प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में रेल राज्य मंत्री रहे रवनीत सिंह बिट्टू (Ravneet Singh Bittu) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत लिया गया है।
रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया था। इसके बाद भाजपा ने 18 जून को हुए राज्यसभा चुनाव में उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। हालांकि, वह अब तक मंत्री पद पर बने हुए थे। शुक्रवार को उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया।
राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने और पार्टी की ओर से दोबारा नामांकन न मिलने के बाद से ही उनके मंत्री पद को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज थीं। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ उनका कार्यकाल भी समाप्त हो गया है।
कांग्रेस से भाजपा तक का राजनीतिक सफर
रवनीत सिंह बिट्टू ने मार्च 2024 में भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था। इससे पहले वह लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे और लोकसभा में पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। वह 2009 में आनंदपुर साहिब और 2014 तथा 2019 में लुधियाना लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे।
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते बिट्टू ने 2024 में भाजपा में शामिल होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में रेल राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी।
संसदीय राजनीति में निभाईं अहम भूमिकाएं
कांग्रेस में रहते हुए रवनीत सिंह बिट्टू लोकसभा में पार्टी के सचेतक भी रहे। वर्ष 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान अधीर रंजन चौधरी के चुनाव प्रचार में व्यस्त रहने पर उन्हें कुछ समय के लिए लोकसभा में कांग्रेस का नेता भी बनाया गया था।
जनवरी 2021 में कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन के दौरान दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर आयोजित ‘जन संसद’ कार्यक्रम में उन पर हमला भी हुआ था। अब उनके इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार में उनके स्थान को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
