मार्कंडेय काटजू

मार्कंडेय काटजू बोले ‘हिन्दी कविता में उर्दू जैसा दम नहीं ’, कुमार विश्वास का ये जवाब

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नई दिल्ली। अपने बयानों को लेकर आए दिन सुर्खियों में बने रहने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू एक बार फिर से  में चर्चा हैं। उनकी ये सुर्खियां हिन्दी कविता पर उनके कमेंट को लेकर है।

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पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने  ट्वीट कर पूछा है कि उर्दू विदेशी भाषा है या भारतीय

मंगलवार को काटजू ने  ट्वीट करते हुए कहा है कि आधुनिक हिन्दी कविता में उर्दू जैसा दम नहीं है। उन्होंने कहा कि आधुनिक हिन्दी कविता वह दम नहीं रखती है जो दम उर्दू में है।  उन्होंने ये भी पूछा है कि उर्दू विदेशी भाषा है या भारतीय।

हिन्दी में काटजू ने कुछ इस तरह से लिखा है, ‘कहो कि हमारे होंठ स्वतंत्र हैं, कहो कि तुम्हारी जीभ अभी तक तुम्हारी है

काटजू यहीं पर नहीं रुके और इसके बाद उन्होंने ये लाइन लिखी है। ‘सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।’ फिर इसके बाद इसी लाइन को हिन्दी शब्दों में इस तरह से लिखा  ‘शीश कटवाने की इच्छा अब हमारे हद्य में उपस्थित है। ‘ फिर काटजू ने कहा है कि ये क्या आवाज़ है। क्या इसमे कोई दम है? इसके बाद काटजू ने एक और उदाहरण देते हुए लिखा है ‘बोल के लब आज़ाद हैं तेरे, बोल ज़ुबान अब तक तेरी है।’ फिर इसी लाइन को हिन्दी में काटजू ने कुछ इस तरह से लिखा है, ‘कहो कि हमारे होंठ स्वतंत्र हैं, कहो कि तुम्हारी जीभ अभी तक तुम्हारी है।’

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नाराज़ होकर कुमार विश्वास ने फिर ट्वीट करते हुए कुछ इस तरह से काटजू को जवाब दिया

मार्कंडेय काटजू ने कहा कि  शायद इन लाइनों पर मशहूर कवि और आप नेता कुमार विश्वास कभी गौर नहीं करते, लेकिन कुमार विश्वास के अनुसार काटजू ने ये ट्वीट कई बार कुमार को टैग किया है। इसी से नाराज़ होकर कुमार विश्वास ने फिर ट्वीट करते हुए कुछ इस तरह से काटजू को जवाब दिया है।

https://twitter.com/DrKumarVishwas/status/1120594272032567301

‘हिंदी कविता की ‘शक्तिमत्ता’ से आपके अपरिचित रह जाने के पीछे, मेरा कोई योगदान नहीं है! यह आपके निजी अज्ञान, आत्ममुग्धता व अशिक्षा के कारण है! कृपया बार-बार मुझे ‘टैग’ करके अपनी अहमन्या-कुंठा की निरर्थक उलूक-ध्वनि न करें! ईश्वर आपको यथाशीघ्र स्वस्थ्य करे व आपका ‘न्याय’ करे।’ साथ ही आखिर में कुमार विश्वास ने एक हंसते हुए और एक हाथ जोड़ते हुए वाली इमोजी भी इस्तेमाल की ह़ै।

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