लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) का नेतृत्व उत्तर प्रदेश में एक ऐसे शासन मॉडल के रूप में उभरा है, जिसकी पहचान “टाइम-बाउंड निर्णय, जीरो-डिले एक्शन और स्पष्ट जवाबदेही” से होती है। उनकी कार्यशैली ने यह स्थापित किया है कि सत्ता का उद्देश्य केवल नीतिगत घोषणाएं करना नहीं, बल्कि उन्हें तय समयसीमा में जमीन पर उतारना है।
कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर योगी सरकार (Yogi Government) ने राजनीतिक जोखिमों की परवाह किए बिना निर्णायक और सख्त हस्तक्षेप किए। माफिया, संगठित अपराध और अवैध कब्जों के खिलाफ चलाए गए अभियानों ने वर्षों से जड़ जमा चुके आपराधिक तंत्र की कमर तोड़ी।
प्रयागराज, गोरखपुर, कानपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में माफिया की अवैध संपत्तियों पर हुई कार्रवाई ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि “कानून से ऊपर कोई नहीं है”। यह कार्रवाई केवल प्रतीकात्मक नहीं रही, बल्कि इसके ठोस परिणामों से आम नागरिकों में सुरक्षा और भरोसे की भावना सुदृढ़ हुई।
योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की व्यक्तिगत सादगी उनके प्रशासनिक दृष्टिकोण के समानांतर चलती है। एक ओर साधारण जीवनशैली, दूसरी ओर शासन में कठोर अनुशासन, समयपालन और जवाबदेही, यह संतुलन उनकी नेतृत्व शैली की पहचान है। अफसरों के लिए स्पष्ट समयसीमा, नियमित समीक्षा बैठकें और “परफॉर्मेंस आधारित मूल्यांकन प्रणाली” ने सरकारी मशीनरी को अधिक सक्रिय, परिणामोन्मुख और उत्तरदायी बनाया है।
कोविड प्रबंधन में प्रभावी नियंत्रण, निवेश के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की मजबूती, एक्सप्रेसवे व एयरपोर्ट परियोजनाओं का रिकॉर्ड समय में पूरा होना और अवैध खनन पर सख्ती, ये सभी उदाहरण इस बात को रेखांकित करते हैं कि योगी सरकार (Yogi Government) का शासन मॉडल केवल भाषणों या दावों तक सीमित नहीं है। यह मॉडल जमीनी नतीजों के माध्यम से उत्तर प्रदेश की बदली हुई छवि और सुशासन की नई परिभाषा को मजबूती से स्थापित करता है।

