Deepotsav

दीपोत्सव के लिए अयोध्या तैयार, 51 घाटों पर 25 हजार स्वयंसेवकों ने सजाए 24 लाख दीये

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अयोध्या। सातवें दीपोत्सव (Deepotsav) के लिए अयोध्या पूरी तरह से तैयार हो चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर डाॅ राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुशल प्रबंधन में प्रान्तीयकृत दीपोत्सव में वालंटियर्स के सहयोग से 24 लाख से अधिक दीयों को प्रज्ज्वलित करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। शुक्रवार दोपहर में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड टीम द्वारा 51 घाटों के दीए की गणना पर्यवेक्षक, घाट प्रभारी, समन्वयक व गणना वालंटियर की मौजूदगी में शुरू हुई।

विवि की कुलपति प्रोफेसर प्रतिभा गोयल ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप पदाधिकारियों को यथा आवश्यक निर्देश प्रदान किया गया है। विश्वविद्यालय आवासीय परिसर, सम्बद्ध महाविद्यालयों, इण्टर कालेजों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारी दीपोत्सव को लेकर अति उत्साहित हैं। सभी के सहयोग से पुनः अयोध्या एक बार फिर विश्व कीर्तिमान बनाएगी।

दीपों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

दीपोत्सव (Deepotsav) के नोडल अधिकारी प्रो संत शरण मिश्र ने बताया कि 11 नवम्बर का दीपोत्सव अद्भुत, आलौकिक होगा। प्रशासन के सहयोग से कार्य को अंतिम रूप दे दिया गया है। 51 घाटों पर दीयों की सुरक्षा पुलिस प्रशासन व विश्वविद्यालय के सुरक्षा कर्मियों द्वारा की जा रही है। शनिवार को दीपोत्सव के दिन प्रातः 10 बजे से पर्यवेक्षक, घाट प्रभारी, समन्वयक व गणना वालंटियर्स की देखरेख में 24 लाख से अधिक दीए में तेल डालने, बाती लगाने व देर शाम शासन द्वारा नियत समय पर दीए प्रज्जवलित किए जायेंगे। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड टीम द्वारा सभी घाटों के दीपों की गणना की जा रही है।

सुबह से ही वॉलेंटियर्स दीयों में भरेंगे तेल

उन्होंने बताया कि शनिवार को वॉलेंटियर्स एवं पदाधिकारी दीयों में तेल भरने का कार्य करेंगे। सभी को एक-एक लीटर की सरसों की बोतलें दी जाएंगी। हर वॉलेंटियर सावधानी पूर्वक 30 दीए में तेल डालेगा। दीये का ऊपरी हिस्सा कुछ खाली रखा जायेगा। तेल घाट पर न गिरे इसका विशेष ध्यान रखा जायेगा। दीये में तेल डालने के पश्चात बाती के आगे वाले भाग पर कपूर का पाउडर लगाएंगे, जिससे वालंटियर्स को दीये प्रज्ज्वलित करने में आसानी होगी।

दीपोत्सव ने बढ़ाई अयोध्या की भव्यता, बढ़ने लगी पर्यटकों की आमद

प्रत्येक घाट पर दीयों को प्रज्ज्वलित करने के लिए कैंडल, माचिस, डंडे लगे कैंडल तथा अन्य सामग्री घाट के अनुसार निर्धारित दीयों की संख्या के अनुपात में एक ही बार में समन्वयकों को उपलब्ध करा दी जाएंगी।

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