CM Yogi held a review meeting on prison administration and correctional services

गंभीर बीमार बंदियों की समयपूर्व रिहाई के नियम सरल और स्पष्ट किए जाएं : मुख्यमंत्री

141 0

लखनऊ:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने गंभीर बीमारियों से ग्रसित बंदियों की समयपूर्व रिहाई से संबंधित नियमों को और अधिक सरल, स्पष्ट तथा मानवीय दृष्टिकोण से परिभाषित किए जाने की आवश्यकता जताई।

सोमवार को कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाओं की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन करते हुए प्रदेश की नीति को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री (CM Yogi) ने स्पष्ट किया कि पात्र बंदियों की रिहाई स्वतः विचाराधीन होनी चाहिए और इसके लिए उन्हें अलग से आवेदन न करना पड़े।

मुख्यमंत्री (CM Yogi) ने निर्देश दिए कि प्राणघातक रोग से पीड़ित होने की आशंका वाले सिद्धदोष बंदी, जिसे मुक्त करने पर उसके स्वस्थ होने की उपयुक्त संभावना है तथा वृद्धावस्था, अशक्तता या बीमारी के कारण भविष्य में ऐसा अपराध करने में स्थायी रूप से असमर्थ बंदी, जिसके लिये वह दोषी ठहराया गया हो के साथ-साथ घातक बीमारी या किसी प्रकार की अशक्तता से पीड़ित सिद्धदोष बंदी जिसकी मृत्यु निकट भविष्य में होने की संभावना हो, के संबंध में प्रदेश के सभी कारागारों में सर्वेक्षण कर वास्तविक संख्या का आकलन किया जाए। इनमें महिलाओं, बुजुर्गों को प्राथमिकता के आधार पर रिहा करने की व्यवस्था हो। मुख्यमंत्री ने कैदियों को कृषि, गोसेवा आदि कार्यों से जोड़कर उनकी जेल अवधि के सदुपयोग करने के लिए व्यवस्था बनाने की भी आवश्यकता बताई।

मुख्यमंत्री (CM Yogi) ने कहा कि जेल मैनुअल में यह भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना आवश्यक है कि किन बीमारियों को असाध्य रोग की श्रेणी में रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए समयपूर्व रिहाई उन्हीं मामलों में की जानी चाहिए, जहाँ से सामाजिक जोखिम न हो। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि हत्या, आतंकवाद, देशद्रोह, महिला और बच्चों के विरुद्ध जघन्य अपराध जैसे मामलों में रिहाई कतई नहीं की जानी चाहिए।

नियमों में बदलाव पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री (CM Yogi) ने कहा कि प्रत्येक वर्ष तीन बार जनवरी, मई और सितम्बर में पात्र बंदियों के मामलों की स्वतः समीक्षा की व्यवस्था हो। यदि किसी बंदी को रिहाई न दी जाए तो उसके कारण स्पष्ट रूप से दर्ज किए जाएं और उसे यह अधिकार मिले कि वह उस निर्णय को चुनौती दे सके।

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा सुझाई गई प्रणाली को उत्तर प्रदेश में अपनाने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि बंदियों को न्यायिक अधिकारों का लाभ सुचारू रूप से मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, त्वरित और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित होनी चाहिए तथा जल्द ही नई नीति का प्रारूप तैयार कर अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया जाए।

Related Post

CM Yogi laid the foundation stone of biopolymer plant

प्रयागराज में आस्था और कुंभी में निवेश के महाकुम्भ को देश देख रहा : सीएम योगी

Posted by - February 22, 2025 0
लखनऊ: प्रयागराज में महाकुम्भ (Maha Kumbh) के पवित्र स्नान के लिए देश-विदेश के श्रद्धालु उमड़ रहे हैं, वहीं लखीमपुर खीरी…
CM Yogi

मल्टी एंड रीलिंग यूनिट्स से लैस होंगे महाराजगंज, बस्ती, सहारनपुर व औरैया

Posted by - July 7, 2024 0
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सकारात्मक कारोबारी माहौल को बढ़ाकर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने के लक्ष्य की ओर…
Bhamashah Jayanti

भव्य आयोजनों के जरिए ‘व्यापारी कल्याण दिवस’ के रूप में मनेगी भामाशाह जयंती

Posted by - September 18, 2023 0
लखनऊ । देश की आन-बान शान रहे वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की बहादुरी के किस्से-कहानियों की बात करते लोग आज भी…
Tourist

विदेशियों में भी बढ़ा आकर्षण, लगभग 23 लाख विदेशी पर्यटकों ने किया उत्तर प्रदेश का भ्रमण

Posted by - January 27, 2025 0
लखनऊ:  ‘योगी के यूपी’ की लोकप्रियता पर्यटकों (Tourists) के बीच निरंतर बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के जारी…