UP STF

नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले पिता-पुत्र को एसटीएफ़ ने किया गिरफ्तार

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लखनऊ। यूपी एसटीएफ (UP STF) ने सरकारी विभागों में संविदा पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर सैकड़ों बेरोजगारों से करोड़ों रुपए की ठगी करने वाले पिता-पुत्र को लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके से गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार किये गये आरोपियों में गैंग सरगना राजेश गुप्ता और उसका पुत्र अभिषेक गुप्ता है। ये दोनों ग्राम दुगार्गंज, काकोरी के रहने वाले हैं। इनके पास से 12 मोबाइल फोन, लैपटाप, प्रिन्टर, इन्टरनेट डोंगल, पैन कार्ड, दो आधार कार्ड, एटीएम कार्ड, 6 चेकबुक, 3 पासबुक, 12 चेक, 23 सादा आईडी कार्ड, 9 नाम-पता लिखा आईडी कार्ड, 8 स्टाम्प पेपर सादे, 5 फर्जी नियुक्ति पत्र, दो कार व 18600 रुपये बरामद हुए हैं।

दरअसल, एसटीएफ काफी समय से विभिन्न सरकारी विभागों में भर्ती कराने के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र, परिचय पत्र देकर ठगी करने वाले गिरोहों के सक्रिय होने की सूचनाएं मिल रही थीं। इस सम्बन्ध एक टीम आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगायी गयी थी। अभिसूचना संकलन के माध्यम से जानकारी मिली कि विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर सैकडों बेरोजगारों से करोडों की ठगी करने वाले संगठित गिरोह द्वारा मथुरा निवासी त्रिभुवन सिंह से उनके पुत्र व पुत्री को सीआरपीएफ में हेड कांस्टेबल के पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधडी कर लगभग 25 लाख रुपए ठगी की गयी व माप-तौल लिखित परीक्षा स्वाथ्य परीक्षण कराने के लिए फर्जी दस्तावेज देकर डीआईजी सीआरपीएफ अजमेर राजस्थान भेजा गया तो वहॉ पता चला कि यहॉ पर कोई भर्ती नर्ही है। इस सम्बन्ध में त्रिभुवन सिंह ने 27 अगस्त 2021 को थाना रिफाइनरी, मथुरा में केस दर्ज कराया था। इस मामले में एसटीएफ की टीम छानबीन कर रही थी कि मिली सूचना के आधार पर आज एसटीएफ की टीम ने मथुरा की पुलिस के साथ दोनों आरोपियों को को ठाकुरगंज चौराहे के पास, सदगुरू सहाय रोड गोदाम के बेसमेण्ट से गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में गिरफ्तार अभियुक्त राजेश गुप्ता ने बताया कि वर्ष 1989 में व जीपीओं लखनऊ की कैटीन में सेल्समैन के पद पर नौकरी ज्वाइन किया परन्तु वर्ष 2002 में बर्खास्त हो गया। 17 महीने बाद बहाल हुआ और 2005 में फिर से सस्पेंड कर दिया गया। 2006 में बहाल होने के पश्चात विभाग द्वारा प्राइमरी स्केल पर वेतन कर दिया गया। इसके पश्चात वेतन कम होने पर वह लोगों को संविदा व सरकारी पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी कर जालसाजी करने लगा। उसके द्वारा विभिन्न विभागों में नौकरी दिलाने के लिए कानपुर के शुभम चौहान से 3 लाख 50 हजार रुपए, सिब्बू पाण्डेय निवासी सिद्वार्थनगर से 04 लाख रुपए, सुशील यादव, इटावा से 2 लाख 70 हजार, रमा शंकर शुक्ला से 50 हजार रुपए, त्रिभुवन सिंह मथुरा से उनके पुत्र व पुत्री को सीआरपीएफ में भर्ती कराने के लिए वर्ष 2016 से लेकर 2019 तक कुल 25 लाख रुपए आदि की ठगी की गयी। राजेश गुप्ता ने यह भी बताया कि बारामद कूटरचित दस्तावेज लैपटाप पर उसका पुत्र अभिषेक गुप्ता बनाता है। इन दस्तावेजों का प्रयोग वह लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने के लिए करता है। वह लोगों को एफसीआई, रेलवे, ब्रिटिश एम्बेसी, अमेरिका एम्बेसी, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक आफ बड़ोदा, राष्ट्रपति भवन, मैट्रो, विद्युत विभाग, शिक्षा विभाग, 108 एम्बुलेन्स, सीएचसी व सीआरपीएफ आदि में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करता है। उसने बताया कि वह मुख्य डाक घर की कैन्टीन में मैनेजर है, वह लोगों को यह बताता हूॅ कि वह मुख्य डाक घर लखनऊ का मैनेजर हैं, जिससे लोग उस पर विश्वास कर नौकरी के लालच में आकर उसके जाल में फंस जाते हैं।

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