european union

भारत और यूपरीय संघ के मजबूत होते संबंध

1030 0

इस विषम कोरोना काल (Corona)में विभिन्न देशों से संवाद बनाए रखना अपने आप में बड़ी चुनौती है। सामाजिक दूरी की अनिवार्यता को देखते हुए ही दुनिया के देश परस्पर वर्चुअल संवाद कर रहे हैं, यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।  ब्रिटेन और भारत के प्रधानमंत्रियों ने कहा है कि 2030 तक आपसी संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदलना उनकी शीर्ष प्राथमिकता में होगा। दोनों नेताओं ने स्वास्थ्य, शिक्षा में सहयोग के साथ मौजूदा द्विपक्षीय कारोबार को दोगुना करने और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर तालमेल बढ़ाने पर सहमति जतायी है।

कोविड महामारी (Coronavirus) में भारत की त्वरित सहायता करने वाले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने भरोसा दिया है कि भारत के पेशेवरों के लिए उनका दरवाजा अब पहले से ज्यादा खुलेगा। उन्होंने अगले दो वर्षों में 3000 प्रशिक्षित भारतीयों को रोजगार देने की बात कही है। शिखर वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच नौ अहम समझौते हुए हैं जिससे दोनों देशों के आर्थिक कारोबार का नए क्षितिज पर पहुंचना तय है।

इन समझौतों में एक महत्वपूर्ण समझौता मुक्त व्यापार समझौता है जिसे लेकर दोनों देश बेहद उत्सुक हैं। इस मसले पर दोनों देशों के उद्योग और वाणिज्य मंत्रालयों के प्रतिनिधि बातचीत कर आगे की राह तय करेंगे। यह समझौता कितना महत्वपूर्ण है इसी से समझा जा सकता है कि गत जनवरी में ब्रिटेन के दक्षिण एशिया मामलों के मंत्री लॉर्ड तारिक अहमद ने कहा था कि भविष्य में होने वाले मुक्त व्यापार समझौता भारत और ब्रिटेन के कारोबारी रिश्तों के लिए बहुत अहम होगा।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि हमारा अंतिम लक्ष्य मुक्त व्यापार समझौता को मूर्तरूप देना है। गौरतलब है कि मुक्त व्यापार करार के तहत व्यापार में दो भागीदार देश आपसी व्यापार वाले उत्पादों पर आयात शुल्क में अधिकतम कटौती करते हैं। चूंकि भारत ने हमेशा से ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के देशों के साथ व्यापार के मामले में एक ‘मुख्य द्वार’ के रूप में देखा है ऐसे में मुक्त व्यापार समझौता न केवल ब्रिटेन बल्कि भारत के लिए भी फायदे का सौदा होगा। एक अन्य समझौता माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप से संबंधित है जो भारत के प्रशिक्षित लोगों को ब्रिटेन जाने की राह को सुगम करेगा। बदलते वैश्विक परिदृश्य में दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद से निपटने, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी का समर्थन, पर्यावरण, रक्षा उपकरणों व अत्याधुनिक हथियारों का साझा उत्पादन तथा अफगानिस्तान के हालात जैसे अन्य कई मसलों पर गंभीरता से चर्चा की।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में आर्थिक अपराध कर ब्रिटेन में छिपे नीरव मोदी और विजय माल्या के प्रत्यर्पण का भी मसला उठाया। अच्छी बात है कि दोनों देशों के बीच कारोबार बढ़ाने के संकल्प के बीच भारत की 20 भारतीय कंपनियों समेत सबसे बड़ी वैक्सीन बनाने वाली भारतीय कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया ने ब्रिटेन में 2400 करोड़ रुपए का निवेश करने का एलान किया। आने वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ेगी और ऐसे द्विपक्षीय समझौतों सभी पक्षों को लाभ होगा। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2030 तक भारत तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक अर्थव्यवस्था के आकार में भारत 2025 में ब्रिटेन से, 2027 में जर्मनी से और 2030 में जापान से आगे निकल जाएगा। संभवत: यही वजह है कि ब्रिटेन भारत के साथ टेÑड डील को लेकर बेहद गंभीर है। वर्चुअल वार्ता से पहले ब्रिटिश पीएम जॉनसन ने भारत में एक अरब पाउंड यानी दस हजार करोड़ रुपये निवेश करने का एलान किया। उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के मध्य व्यापार एवं पूंजी निवेश में तीव्रता आयी है। जहां तक द्विपक्षीय व्यापार का सवाल है तो ब्रिटेन भारत का विश्व में दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक सहयोगी देश बन चुका है।

गौरतलब है कि दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार जो 2018-19 में 16.7 अरब डॉलर, 2019-20 में 15.5 अरब डॉलर था वह अब बढ़कर 23 अरब डॉलर यानी 2.35 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच चुका है। इससे दोनों देशों के तकरीबन 5 लाख लोगों को रोजगार मिलता है। ब्रिटेन में लगभग 800 से अधिक भारतीय कंपनियां हैं जो आईटी क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। इस संदर्भ में टाटा इंग्लैंड में नौकरियां उपलब्ध कराने वाली सबसे बड़ी भारतीय कंपनी बन चुकी है। भारतीय कंपनियों का विदेशों में कुल निवेश 80 बिलियन अमेरिकी डॉलर के पार पहुंच गया है। दूसरी ओर ब्रिटेन से भारत के बीपीओ क्षेत्र में आउटर्सोसिंग का काम भी बहुत ज्यादा आ रहा है।

भारत और यूरोपीय संघ ने शनिवार को आठ वर्ष के अंतराल के बाद मुक्त कारोबार समझौता (एफटीए) पर बातचीत शुरू करने की घोषणा की। साथ ही निवेश सुरक्षा तथा भौगोलिक संकेत के विषय पर दो महत्वपूर्ण समझौते पर वार्ता शुरू करने पर भी सहमति जतायी।

इस संबंध में निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ समूह के शासनाध्यक्षों या राष्ट्राध्यक्षों के बीच डिजिटल माध्यम से हुई शिखर बैठक में लिया गया। इस बैठक में कारोबार, सम्पर्क और निवेश के क्षेत्र सहित सम्पूर्ण सहयोग बढ़ाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में यूरोपीय संघ को भारत एवं दक्षिण अफ्रीका के उस प्रस्ताव का समर्थन करने का आग्रह किया जिसमें कोविड-19 रोधी टीके पर पेटेंट में छूट देने की बात कही गई है ताकि टीके तक पूरी दुनिया की समान रूप से पहुंच सुनिश्चित हो सके। हालांकि, इस विषय पर यूरोपीय संघ की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका।

अमेरिका ने कुछ दिन पहले इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) संतुलित, महत्वाकांक्षी और समग्र व्यापार एवं निवेश समझौता के लिए वार्ता बहाल करने पर सहमत हुए। यह  भी कुछ कम नहीं है।

Related Post

CM Dhami appreciated the contribution of LIC

LIC ने मुख्यमंत्री राहत कोष हेतु 1 करोड़ रुपये का चेक भेंट किया, सीएम ने की सराहना

Posted by - November 10, 2025 0
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Dhami) से आज भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री आवास पर…
प्रियंका गांधी

मोदी सरकार जितना आवाज दबाएंगी, उतनी तेज आवाज उठेगी : प्रियंका गांधी

Posted by - December 19, 2019 0
नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि मेट्रो स्टेशन बंद हैं। इंटरनेट बंद है। हर…
भारत बचाओ रैली

भारत बचाओ रैली : सोनिया गांधी बोलीं- अंधेरनगरी और चौपट राजा जैसा माहौल

Posted by - December 14, 2019 0
नई दिल्ली। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को भारत बचाओ रैली को संबोधित करते हुए कहा कि…