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व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे इस महिला ने कर दिया कमाल, बन गईं मिसाल

deepa malik

लखनऊ डेस्क। व्हीलचेयर पर बैठा इंसान भला कैसे कोई कमाल कर सकता है, लेकिन अगर आप दीपा मलिक के बारे में जानेंगे तो नि:संदेह उनके हौसले और जज्बे को सलाम करेंगे। रियो पैरालंपिक खेल- 2016 में दीपा मलिक ने व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे ही 4.61 मीटर तक गोला फेंका और दूसरे स्थान पर रहीं और इस तरह पैरालंपिक खेलों में मेडल जीतने वाली दीपा पहली भारतीय महिला बन गईं।

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आपको बता दें दीपा मलिक बचपन से ही काफी बुलंद इरादों वाली थीं। लेकिन छह साल की छोटी सी उम्र में ही उनके साथ एक हादसा हो गया। एक दिन अचानक उनको पीठ में जबरदस्त दर्द उठा। जब अच्छे से जांच हुई तो उनकी रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर निकला, लेकिन एक ऑपरेशन के बाद इसे निकाल लिया गया। पर शरीर में कुछ परेशानिया शुरू हो गईं।

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जानकारी के मुताबिक दीपा कहती हैं, शरीर की अपंगता ने मेरा  हौसला तोड़ने का प्रयास किया। लेकिन मैंने बिना हार माने वक्त को झुकाने का फैसला किया और परिवार को अपने समर्थन में तैयार करके सभी मुश्किलों को बड़ी जिम्मेदारी के साथ न सिर्फ कड़ी टक्कर दी, बल्कि हर वार में मात भी दी। 29 अगस्त 2019 को उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राजीव गांधी खेलरत्न से सम्मानित किया।

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