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63,383 किमी सड़क सुदृढ़ीकरण, 1,740 पुल और 35,433 किमी ग्रामीण मार्ग, 9 वर्षों में यूपी इंफ्रास्ट्रक्चर ने भरी ऐतिहासिक उड़ान

cm yogi

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बीते 9 वर्षों के दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) के क्षेत्र में व्यापक बदलाव दर्ज किए गए हैं, जिसने प्रदेश की विकास यात्रा को नई गति दी है। वर्ष 2017 से पहले जहां सड़क और कनेक्टिविटी का विस्तार सीमित था, वहीं अब 63,383 किमी सड़कों का सुदृढ़ीकरण, 1,740 पुलों का निर्माण और 35,433 किमी ग्रामीण मार्गों का विकास प्रदेश की बदली तस्वीर को दर्शाता है। नई तकनीक, ग्रीन इनिशिएटिव्स और तेज क्रियान्वयन के जरिए उत्तर प्रदेश न केवल मजबूत कनेक्टिविटी नेटवर्क स्थापित कर चुका है, बल्कि भविष्य में देश के अग्रणी इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल के रूप में उभरने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।

2017 से पहले की स्थिति-

वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सड़क निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) विकास की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी थी। वर्ष 2012 से 2017 के बीच जहां लगभग 31,868 किमी मार्गों का चौड़ीकरण/सुदृढ़ीकरण हुआ, वहीं पुल निर्माण की संख्या भी सीमित रही। ग्रामीण और तहसील स्तर पर कनेक्टिविटी का अभाव विकास में एक बड़ी बाधा था, जिससे आर्थिक गतिविधियों और आवागमन पर सीधा प्रभाव पड़ता था।

9 वर्षों में तेज रफ्तार विकास-

वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) विकास ने अभूतपूर्व गति पकड़ी। लगभग 63,383 किमी सड़कों का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया गया, जो पहले की तुलना में दोगुने से अधिक है। 2.72 लाख किमी से अधिक मार्गों का नवीनीकरण कर सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाया गया। 1,740 पुलों का निर्माण कर कनेक्टिविटी को नई मजबूती दी गई। 35,433 किमी ग्रामीण सड़कों का निर्माण कर गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ा गया।

तहसील और विकास खंड मुख्यालयों को 2-लेन सड़कों से जोड़ने का व्यापक कार्य किया गया। राजधानी लखनऊ में लगभग ₹7000 करोड़ की लागत से ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण, शहरी ट्रैफिक प्रबंधन का आधुनिक उदाहरण बना। साथ ही, नई तकनीकों के उपयोग, वेस्ट प्लास्टिक से सड़क निर्माण और ई-गवर्नेंस जैसे नवाचारों ने गुणवत्ता और स्थायित्व को भी बढ़ाया है। आज प्रदेश में औसतन 19 किमी प्रतिदिन सड़क निर्माण/सुदृढ़ीकरण का कार्य किया जा रहा है, जो विकास की गति को स्पष्ट दर्शाता है।

भविष्य की राह-

आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सड़क नेटवर्क के और विस्तार, अत्याधुनिक सेतु निर्माण, ग्रीन टेक्नोलॉजी के उपयोग और स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए प्रदेश को एक आधुनिक, सुरक्षित और सतत कनेक्टिविटी मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। सरकार का फोकस केवल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि गुणवत्ता, पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी नवाचार के माध्यम से दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करना भी है। इससे न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि निवेश, उद्योग और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

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