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उत्तर प्रदेश: बीमारू राज्य से स्टार्टअप हब बनने की कहानी

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की कहानी बदल रही है। कभी देश में बीमारू राज्य माना जाने वालो उत्तर प्रदेश आज देश के अग्रणी स्टार्टअप हब (Startup Hub) बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार लगातार वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। बीते कुछ वर्षों में प्रदेश की नीतियों, निवेश माहौल और प्रशासनिक सुधारों का परिणाम अब दिखने लगा है। उत्तर प्रदेश अब केवल श्रम शक्ति का नहीं बल्कि नवाचार, उद्यमिता और स्टार्टअप (Startup) संस्कृति का भी मजबूत केंद्र बन रहा है। 

सरकार का फोकस युवाओं को अवसर देने, पूंजी उपलब्ध कराने और उन्हें सुरक्षित वातावरण देने पर है, जिससे वे अपने विचारों को सफल उद्यम में बदल सकें। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम है। इसमें उत्तर प्रदेश की भी बड़ी भूमिका है। आज उत्तर प्रदेश में लगभग 19 हजार स्टार्टअप्स (Startups) हैं। यहां का स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार बड़ा होता जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्टार्टअप इंडिया के एक दशक पूरा होने पर कहा था कि “उत्तर प्रदेश आज देश के अग्रणी स्टार्टअप (Startup) परिवेश के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। इस विकासोन्मुख अभियान से ‘आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत’ की यात्रा को नई ऊर्जा प्राप्त हो रही है।“

 युवाओं को नौकरी देने वाला बनने की सोच से आगे बढ़ रही योगी सरकार

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच है कि प्रदेश का युवा आत्मनिर्भर बने और नौकरी तलाशने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बने। इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति (Startup Policy) को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। इस नीति के अंतर्गत स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता, सीड फंडिंग और वेंचर कैपिटल तक पहुंच आसान की गई है। सरकारी स्तर पर इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किए गए हैं, जहां युवाओं को तकनीकी मार्गदर्शन मेंटरशिप और बाजार से जोड़ने का अवसर मिल रहा है। सरकार की ओर से यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि शुरुआती दौर में स्टार्टअप्स को कानूनी और प्रशासनिक जटिलताओं से न जूझना पड़े जिससे वे पूरी ऊर्जा नवाचार पर लगा सकें।

स्टार्टअप्स (Startups) से रोजगार सृजन को मिल रहा है बढ़ावा

स्टार्टअप्स (Startups) को बढ़ावा देने का सीधा असर रोजगार सृजन पर पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश में स्थापित हो रहे नए उद्यम न केवल आईटी और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वरन कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहे हैं। प्रदेश सरकार का मानना है कि एक मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दे सकता है। यही कारण है कि सरकार स्टार्टअप्स को उद्योग का दर्जा देकर उन्हें विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं से जोड़ रही है। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति मिलने के साथ-साथ सामाजिक विकास को भी मजबूती मिल रही है।

नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश 

मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे नवाचार आधारित बन रही है। सरकार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रही है, जिससे कि स्टार्टअप्स (Startups) को आधुनिक तकनीक और डिजिटल सेवाओं का लाभ मिल सके। ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन सिंगल विंडो सिस्टम और पारदर्शी नीतियों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। प्रदेश में अब ऐसे स्टार्टअप्स सामने आ रहे हैं, जो स्थानीय समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर खोज रहे हैं। इससे न केवल क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिल रहा है, प्रदेश की पहचान एक इनोवेशन फ्रेंडली स्टेट के रूप में भी बन रही है।

आत्मनिर्भर व विकसित भारत में बढ़ रही है प्रदेश की भूमिका

आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में उत्तर प्रदेश की भूमिका अहम होती जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियां प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक इंजन बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। स्टार्टअप्स के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंच मिल रही है, जिससे मेक इन इंडिया को मजबूती मिल रही है। सरकार का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश का हर युवा अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर आत्मनिर्भर बने और देश की आर्थिक प्रगति में योगदान दे।

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