लखनऊ। उत्तर प्रदेश का पर्यटन एवं संस्कृति विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन और मार्गदर्शन में राज्य की समृद्ध विरासत, धार्मिक स्थलों, कला-संस्कृति के साथ प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का संरक्षण, संवर्धन और विकास कर, प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को नया आयाम प्रदान कर रहा है। वर्ष 2025 में 156.18 करोड़ पर्यटकों (Tourists) के आगमन के साथ उत्तर प्रदेश पर्यटकों की संख्या के मामले में देश में शीर्ष पर पहुंच चुका है। इसमें मुख्यमंत्री की दूरगामी पर्यटन नीति-2022 के सफल क्रियान्वयन और प्रयागराज में वर्ष 2025 में भव्य महाकुम्भ के आयोजन का विशेष योगदान है। साथ ही वर्ष 2025 में 12 थीमैटिक सेक्टर्स और 12 पर्यटन सर्किट विकास के लिए 1546 प्रस्तावों के लिए 34,439 करोड़ रुपये के निवेश के लक्ष्य की प्राप्ति हुई है। ईको टूरिज्म के विकास के लिए वर्ष 2025 में 49 परियोजनाओं की शुरूआत की गई है और राष्ट्रीय पर्यटन दिवस-2025 पर ‘समावेशी विकास के लिए पर्यटन’ थीम पर आधारित नीतियों का संचालन किया जा रहा है। यह उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक टूरिज्म हब के रूप में विकसित होने का स्पष्ट संकेत है।
उत्तर प्रदेश अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक महत्व और पर्यटन नीतियों के बल पर देश का प्रमुख पर्यटन केंद्र बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विशेष प्रयासों से उत्तर प्रदेश पर्यटकों की संख्या के मामले में 2.4 गुना की वृद्धि के साथ वर्ष 2025 में देश में प्रथम स्थान पर पहुंच चुका है। वर्ष 2024 में जहां उत्तर प्रदेश में कुल 64.91 करोड़ पर्यटक (Tourists) आए थे, वहीं, 140.6% की अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज करते हुए वर्ष 2025 में देश में सर्वाधिक 156.18 करोड़ पर्यटकों का उत्तर प्रदेश में आगमन हुआ जिसमें विश्व रिकॉर्ड में दर्ज प्रयागराज के महाकुंभ-2025 के आयोजन में आए 66.30 करोड़ श्रद्धालु/पर्यटक (Tourists) भी शामिल हैं। यूपी घरेलू पर्यटकों की संख्या में वर्ष 2022 से ही शीर्ष पर बना हुआ है। विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि के साथ यूपी वर्ष 2023 में 5वें स्थान से वर्ष 2024 में चौथे स्थान पर पहुंच चुका है।
उत्तर प्रदेश में पर्यटन आधारित गतिविधियों और अर्थव्यवस्था के विकास की नींव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरगामी पर्यटन नीति-2022 ने रखी। इसके तहत वर्ष 2025 में पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए 12 थीमैटिक सेक्टर्स विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें विरासत-कला-सांस्कृतिक, आध्यात्मिक-धार्मिक, ईको-नेचर-वाइल्डलाइफ, वेलनेस-मेडिकल, एमआईसीई (मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंसेज, एक्जिबिशन्स), एडवेंचर, जल-आधारित, कृषि, व्यंजन, ग्रामीण-जनजातीय, युवा और वेडिंग डेस्टिनेशन पर्यटन शामिल हैं। इन क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए 1564 प्रस्तावों पर 34,439 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल किया गया। वहीं ईको टूरिज्म के तहत 49 परियोजनाओं की शुरूआत हुईं, जो जैव-विविधता संरक्षण के साथ होमस्टे और हस्तशिल्प से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा दे रही हैं।
पर्यटकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से प्रदेश में 12 विशेष पर्यटन सर्किट विकसित किए जा रहे हैं, जो पर्यटकों (Tourists) को मनोरंजक एवं यादगार अनुभव प्रदान करेंगे। साथ ही ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए 85 रूरल होमस्टे और 155 टूर ऑपरेटर्स पंजीकृत किए गए हैं। वहीं प्रदेश की अमूल्य संस्कृति संरक्षण के लिए कला, संगीत, शिल्प और लोकनृत्य से जुड़े समूहों को भी अनुदान दिए गए हैं।
उत्तर प्रदेश अब ‘सांस्कृतिक टूरिज्म हब’ के रूप में उभर रहा है, जहां अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, प्रयागराज जैसे धार्मिक पर्यटन स्थल वैश्विक आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं। यह उपलब्धि न केवल आर्थिक विकास को गति दे रही है, बल्कि स्थानीय समुदायों को भी सशक्त बना रही है।

