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सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से पहले जान लें सही विधि

Shivling

श्रावण मास (Sawan) में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु शिवालयों में पहुंचकर शिवलिंग (Shivling) का जलाभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में श्रद्धा से किया गया जलाभिषेक भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है।

प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने हाल ही में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की विधि और उसके आध्यात्मिक महत्व को लेकर विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग पूजा तो करते हैं, लेकिन सही क्रम और विधि से अनजान रहते हैं।

शिवलिंग के प्रत्येक भाग का बताया महत्व

पंडित प्रदीप मिश्रा के अनुसार, शिवलिंग का प्रत्येक हिस्सा धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। उन्होंने बताया कि शिवलिंग के आधार, जलाधारी और उससे निकलने वाले जल के प्रवाह को भी अलग-अलग देवी-देवताओं से जोड़कर देखा जाता है।

ऐसे करें जलाभिषेक

उनके अनुसार, जलाभिषेक की शुरुआत जलाधारी के दाईं ओर जल अर्पित कर अपनी मनोकामना व्यक्त करने से करनी चाहिए। इसके बाद बाईं ओर परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना करते हुए जल चढ़ाएं। फिर मध्य भाग में जल अर्पित करें और अंत में शिवलिंग पर जल चढ़ाकर पूजा पूरी करें।

धार्मिक मान्यताओं में मतभेद संभव

धार्मिक आचार-विचार और पूजा-पद्धतियां अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकती हैं। इसलिए श्रद्धालु अपने गुरु, पुरोहित या पारिवारिक परंपरा के अनुसार भी जलाभिषेक की विधि का पालन कर सकते हैं।

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