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स्टाम्प-निबंधन विभाग राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए चला रहा विशेष अभियान

stamp duty

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लखनऊ: योगी सरकार प्रदेश के राजस्व संग्रह व्यवस्था को मजबूत करने और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर स्टाम्प एवं निबंधन विभाग (Stamp-Registration Department) विशेष अभियान चलाकर अपंजीकृत संपत्तियों के पंजीकरण, लंबित स्टाम्प वादों के निस्तारण और विभिन्न संस्थाओं से देय स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty)  की वसूली पर जोर दे रहा है। अभियान का उद्देश्य राजस्व में वृद्धि के साथ-साथ संपत्ति लेनदेन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है।

स्टाम्प दरों (Stamp Duty) का कराया जा रहा व्यापक सर्वे-

प्रदेश भर के विकास प्राधिकरणों,  आवास विकास परिषद,  यूपीएसआईडीसी तथा अन्य संस्थाओं की अपंजीकृत संपत्तियों का विशेष अभियान के तहत पंजीकरण कराया जा रहा है। इसके साथ ही विभिन्न विकास प्राधिकरणों और सरकारी एजेंसियों से जुड़े समझौतों और परियोजनाओं की समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि निर्धारित स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) का भुगतान समय पर हो। इसके साथ ही स्टाम्प दरों का भी व्यापक सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे का उद्देश्य प्रदेश में संपत्तियों की अद्यतन और वास्तविक न्यूनतम बाजार दरों को मूल्यांकन सूची में शामिल करना है, ताकि राजस्व संग्रह में पारदर्शिता आए और बाजार की वास्तविक स्थिति के अनुरूप दरें तय की जा सकें। सर्किल दर सूची के सरलीकरण और मानकीकरण का प्रारूप पहले ही जारी किया जा चुका है। 

जीडीए की न्यू टाउनशिप योजना से मिलेगा 100 करोड़ का राजस्व-

विभाग की ओर से राजस्व बढ़ाने के लिए विभिन्न जिलों में विशेष कार्ययोजनाएं भी बनाई गईं हैं। मुरादाबाद में एमडीए की सहायक और गोविंदपुरम आवासीय योजनाओं से लगभग 22 करोड़ रुपये, वाराणसी में वीडीए की गंजारी स्पोर्ट्स सिटी परियोजना से करीब 40 करोड़ रुपये तथा गोरखपुर में जीडीए की न्यू टाउनशिप योजना से लगभग 100 करोड़ रुपये के राजस्व की संभावना है। इसके अलावा जीआईडीए के लीज और फ्रीहोल्ड विलेखों से लगभग 50 करोड़ रुपये की आय का अनुमान है। इन सभी स्रोतों से मार्च 2026 तक करीब 200 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने की संभावना है।

एनएचएआई के टोल प्लाजा से 72 करोड़ का स्टाम्प देय निर्धारित-

एनएचएआई के टोल प्लाजा से जुड़े मामलों की भी गहन समीक्षा की जा रही है। प्रदेश में एनएचएआई के कुल 123 टोल प्लाजा और संबंधित एजेंसियों के बीच हुए समझौतों का परीक्षण कर लगभग 72 करोड़ रुपये की स्टाम्प देयता निर्धारित की गई है। इन मामलों में विभिन्न न्यायालयों में वाद दर्ज किए गए हैं और प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। गाजियाबाद में एक मामले का निस्तारण करते हुए लगभग 70 लाख रुपये की वसूली की गई है, जबकि कुशीनगर में दो मामलों में लगभग 52 लाख रुपये की वसूली की प्रक्रिया चल रही है। प्रदेश के कई जिलों में विकास प्राधिकरणों और निजी कॉलोनाइजरों की अपंजीकृत संपत्तियों के पंजीकरण के माध्यम से भी राजस्व बढ़ाने की योजना है। गौतमबुद्धनगर में यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से जुड़े मामलों से लगभग 93 करोड़ रुपये का राजस्व की संभावना है।

वहीं, मेरठ में निजी बिल्डरों की अपंजीकृत संपत्तियों और आरआरटीएस परियोजना से लगभग 252 करोड़ रुपये की आय का अनुमान है। इसी तरह गाजियाबाद में जीडीए की हरनंदीपुरम आवासीय योजना और यूपीएसआईडीसी की मोदीनगर परियोजना से लगभग 153 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति की संभावना जताई गई है। इसी तरह बरेली में बीडीए की पीलीभीत आवासीय योजना से करीब 50 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है।

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