महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, शरद पवार (Sharad Pawar) के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी NCP (SP) संसद में पेश होने वाले परिसीमन (Delimitation) विधेयक का समर्थन कर सकती है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने इस मुद्दे पर सकारात्मक रुख अपनाने का फैसला किया है। यदि ऐसा होता है, तो इसे विपक्षी राजनीति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जाएगा, क्योंकि NCP (SP) विपक्षी गठबंधन की प्रमुख सहयोगी पार्टियों में शामिल है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
सूत्रों के दावे के बाद राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे पार्टी की रणनीतिक सोच का हिस्सा मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे केंद्र सरकार के साथ मुद्दा-आधारित सहयोग के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि, जब तक पार्टी की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आता, तब तक समर्थन की इन खबरों को औपचारिक पुष्टि नहीं माना जा सकता।
क्या है परिसीमन विधेयक?
परिसीमन (Delimitation) का मतलब लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण करना होता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर जनगणना के आंकड़ों के आधार पर की जाती है, ताकि आबादी के अनुसार निर्वाचन क्षेत्रों का संतुलन बनाया जा सके।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि बदलती जनसंख्या के अनुरूप विभिन्न क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
पहले विशेष सत्र में नहीं मिल पाया था समर्थन
इस वर्ष अप्रैल में संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किया गया था। उस समय विपक्ष ने एकजुट होकर इसका विरोध किया था।
मतदान के दौरान विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया था। सदन में उस समय कुल 528 सदस्य मौजूद थे। संवैधानिक संशोधन पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत यानी 352 मत नहीं मिल सके, जिसके कारण विधेयक पारित नहीं हो सका।
विधेयक गिरने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि संख्या बल साथ न होने का मतलब हार नहीं है और भविष्य में इस विषय पर फिर प्रयास किए जाएंगे।
अब यदि NCP (SP) वास्तव में इस विधेयक के समर्थन का फैसला करती है, तो संसद में इसकी राजनीतिक तस्वीर पहले की तुलना में अलग दिखाई दे सकती है।

