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करतारपुर कॉरिडोर पर SGPC की पहल, श्रद्धालुओं को राहत की उम्मीद

Kartarpur Corridor

Kartarpur Corridor

अमृतसर। सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने भारत और पाकिस्तान के बीच स्थित पवित्र ‘करतारपुर साहिब कॉरिडोर’ (Kartarpur Corridor) को जल्द से जल्द दोबारा पूरी तरह सक्रिय करने और श्रद्धालुओं के लिए यात्रा नियमों को बेहद सुगम व आसान बनाने की एक बहुत बड़ी मांग उठाई है। एसजीपीसी के मुख्य सचिव बलविंदर सिंह काहलवां ने इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और जमीनी हालात सामान्य होने के रुख को देखते हुए कमेटी द्वारा बहुत जल्द भारत की केंद्र सरकार को एक औपचारिक पत्र भेजा जाएगा।

एसजीपीसी के मुख्य सचिव बलविंदर सिंह काहलवां ने देश के विभाजन की ऐतिहासिक त्रासदी का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1947 के बंटवारे के दौरान सिख पंथ और इतिहास से जुड़े कई बेहद महत्वपूर्ण व पावन गुरुद्वारे पाकिस्तान की सीमा के भीतर रह गए थे। इन अति-पवित्र धार्मिक स्थलों के निर्बाध और सुगम दर्शन (दीदार) के लिए देश-विदेश की सिख संगत लंबे समय से सरकारों से एक सरल और व्यावहारिक व्यवस्था बनाने की मांग करती आ रही है। उन्होंने याद दिलाया कि जब करतारपुर कॉरिडोर की शुरुआत हुई थी, तब प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ सीमा पार स्थित ‘श्री करतारपुर साहिब’ के दर्शन करने जाते थे; लेकिन भारत-पाकिस्तान के बीच पैदा हुए हालिया कूटनीतिक तनाव और सुरक्षा कारणों से पिछले कुछ समय से इस कॉरिडोर के जरिए होने वाली आवाजाही बंद पड़ी है, जिससे नानक-नाम लेवा संगत में भारी निराशा है। काहलवां ने पुरजोर शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार को इस गलियारे को दोबारा खोलने के साथ-साथ यात्रा से जुड़ी जटिल कागजी प्रक्रियाओं में भी बड़े बदलाव करने चाहिए।

कमेटी ने श्रद्धालुओं को पासपोर्ट (Passport) और वीजा (Visa) जैसी बेहद जटिल, लंबी और खर्चीली प्रशासनिक प्रक्रियाओं से पूरी तरह राहत देने की वकालत की है। एसजीपीसी ने केंद्र सरकार को एक व्यावहारिक विकल्प सुझाते हुए मांग की है कि सीमा पार श्री करतारपुर साहिब और श्री ननकाना साहिब के पवित्र दर्शनों के लिए जाने वाले भारतीय नागरिकों को पासपोर्ट के स्थान पर उनके ‘पहचान पत्र’ (जैसे नागरिक पहचान पत्र या किसी अन्य वैध भारतीय आईडी प्रूफ) के आधार पर ही सीधे दर्शन करने की अनुमति दी जानी चाहिए। काहलवां के अनुसार, कागजी नियमों में इस क्रांतिकारी ढील से न केवल सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और बुजुर्ग श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का पूर्ण सम्मान होगा, बल्कि उन्हें बिना किसी मानसिक तनाव के अपने जीवनकाल में इन पवित्र गुरुधामों के दर्शन करने का परम सौभाग्य भी मिल सकेगा।

एसजीपीसी ने स्पष्ट किया है कि इस सरलीकरण और कॉरिडोर बहाली के विस्तृत ब्लूप्रिंट के साथ बहुत जल्द नई दिल्ली में केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों को आधिकारिक मांग पत्र सौंपा जाएगा।

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