सचिन पायलट ने राहुल से कहा,”फैसला लेने से पहले इन बातों का ख्याल जरूर रखे”

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जयपुर। राजस्थान में चुनावी दंगल अब थम चुका है लेकिन अब नए दंगल की भी शुरुवात हो गई है, मुख्यमंत्री कौन होगा? ये सवाल अभी भी बना हुआ है।कांग्रेस सूत्रों से मिली जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो गुरुवार को राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के लिए अशोक गहलोत के नाम पर लगभग मुहर लग चुकी थी। कांग्रेस पार्टी काफी कुछ तय भी कर चुकी थी लेकिन ऐन वक्त पर सचिन पायलट के समर्थकों ने राहुल गांधी से सामने बात रखी और मुख्यमंत्री के नाम पर फिर पेच फंस गया।

बता दें कि अशोक गहलोत सीएम बनने की आला कमान से हरी झंडी लेकर जयपुर के लिए निकल चुके थे लेकिन एयरपोर्ट से उन्हें वापस बुला लिया गया। इसके बाद आधी रात तक राहुल गांधी ने सचिन पायलट और गहलोत से बातचीत की और सीएम के नाम पर फैसला शुक्रवार तक के लिए टाल दिया।

साथ ही ये भी बता दें कि गुरुवार देर रात सचिन पायलट जिस समय राहुल गांधी के साथ उनके निवास पर राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के लिए दावा पेश कर रहे थे, तब पायलट के समर्थक बाहर नारे लगा रहे थे। पायलट ने इस बैठक में न सिर्फ मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की बल्कि आधा दर्जन से अधिक मुद्दों पर तर्क पेश किए कि मुख्यमंत्री उन्हें क्यों नहीं बनाया जा सकता?

विचारणीय तथ्य है कि अगर अशोक गहलोत को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनने की इच्छा थी तो 2013 में हारने के बाद वो खुद प्रदेश अध्यक्ष क्यों नहीं बने। 5 साल प्रदेश में रहते और बीजेपी से लड़ाई लड़ते। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गहलोत दिल्ली की राजनीति में व्यस्त रहे और वहीं से राजस्थान को कंट्रोल करने की कोशिश करते रहे।

बता दें की पायलट ने कहा, मुझ पर मेरे गुर्जर होने की छाप क्यों लगाई जा रही है। मैं किसी जाति की राजनीति नहीं करता। कहा जा रहा है कि 4.5 प्रतिशत गुर्जर हैं, लेकिन मैंने सभी जातियों को एक साथ लाकर अभी तक की राजनीति की है। उन्होंने ये भी कहा की , नेता की जाति ही मायने नहीं रखती, पायलट ने पीएम मोदी की जाति का हवाला देते हुए कहा कि अगर जाति मायने रखती तो पीएम मोदी को जोरदार बहुमत कैसे मिलता?पायलट ने मध्य प्रदेश में कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाने का भी उदाहरण दिया, कहा, एमपी में जाति मायने रखती है, ऐसा सियासी विश्लेषक कहते हैं, लेकिन वहां कमलनाथ को चुना गया, जिनकी जाति मसला नहीं बनी। गहलोत को निशाना बनाते हुए पायलट ने कहा, गहलोत साहब 1998 में सीएम बनने के बाद 2003 में पार्टी को नहीं जिता पाए, फिर 2008 में सीएम बनने के बाद 2013 और 2014 में पार्टी धरातल पर आ गई। ऐसे में 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर उनकी ओर क्यों देखा जा रहा है? पायलट ने आगे कहा, पार्टी में किसी को सीएम बनाना है तो उस हिसाब से फॉर्मूले बनाए जाते हैं और नहीं बनाना है तो उस हिसाब है। इसलिए साढ़े चार साल मेहनत के बाद मुझे बनाना है तो उसका फार्मूला तैयार कर लिया जाएगा और अगर किसी और को बनाना है तो उस हिसाब से फार्मूला बन जाएगा। गहलोत पर बागियों की मदद का भी आरोप लगाया गया। पायलट ने कहा, उन्होंने बड़ा बहुमत रोकने के लिए कई बागियों का साथ दिया है। पार्टी उम्मीदवारों के लिए मुश्किलें पैदा की हैं, जिससे बड़ा बहुमत होने पर आलाकमान सचिन के पक्ष में फैसला ना ले पाए। पालयट ने राहुल गांधी से कहा, पार्टी जो फैसला करेगी वो उन्हें मंजूर होगा, पार्टी कोई फैसला लेने से पहले इन बातों का ख्याल जरूर रखे।

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