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पंजाब ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को दिया बढ़ावा, उज्बेकिस्तान से मजबूत होंगे रिश्ते

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चंडीगढ़: पंजाब सरकार अब मध्य एशिया के बाजारों में अपने कृषि और खाद्य उत्पादों की पहुंच बढ़ाने की दिशा में सक्रिय कदम उठा रही है। इसी कड़ी में पंजाब राज्य खाद्य आयोग ने मैग्सीपा में इन्वेस्ट पंजाब, पंजाब एग्रो और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के सहयोग से उज्बेकिस्तान के साथ व्यापार और निवेश की संभावनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि उज्बेकिस्तान सरकार विदेशी निवेश को बढ़ावा देना चाहती है। हालांकि, पंजाब के उत्पादों की स्थानीय बाजार में मांग और उपयुक्तता का आकलन करने के लिए पहले विस्तृत बाजार सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके आधार पर भविष्य की व्यापारिक रणनीति तैयार की जाएगी।

खाद्य आयोग के चेयरमैन बाल मुकंद शर्मा ने कहा कि पंजाब के बासमती चावल, कृषि मशीनरी, ट्रैक्टर, मसाले, सरसों का तेल, पाम ऑयल, देसी घी, चाय, स्किम्ड मिल्क पाउडर, ड्रिप सिंचाई तकनीक, जल संसाधन प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा तथा विशेष रूप से मार्कफेड और मिल्कफेड के प्रोसेस्ड फूड उत्पादों के लिए उज्बेकिस्तान एक संभावनाओं से भरा बाजार है।

उन्होंने बताया कि उज्बेकिस्तान में कच्चे कृषि उत्पादों की उपलब्धता तो पर्याप्त है, लेकिन कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग से जुड़ा बुनियादी ढांचा सीमित है। ऐसे में पंजाब के प्रोसेस्ड फूड उत्पाद वहां मजबूत बाजार बना सकते हैं।

बैठक में पंजाब से निर्यात किए जाने वाले सामान के लिए उपयुक्त डिस्चार्ज पोर्ट और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा की गई, ताकि व्यापार को व्यावहारिक रूप से आगे बढ़ाया जा सके।

ताशकंद से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े एआई विशेषज्ञ और ए.के.ए.सी.ओ.आर.पी. ग्लोबल टेक के जनरल डायरेक्टर योगेश कुमार ने कहा कि मध्य एशिया का बाजार भारतीय कंपनियों, विशेषकर पंजाब के लिए तेजी से उभरता हुआ अवसर है। उन्होंने बताया कि उज्बेकिस्तान में डिजिटल परिवर्तन भी तेजी से हो रहा है, जिससे व्यापार, तकनीक और कृषि क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाएं खुल रही हैं।

इस पहल को पंजाब के कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात क्षेत्र को वैश्विक बाजारों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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