प्रज्ञा योग

शारीरिक और मानसिक दृढ़ता को मजबूत करता है प्रज्ञा योग

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हरिद्वार। विश्व भर में इन दिनों कोरोना महामारी को लेकर लोग तनाव तथा चिंता से ग्रसित हो रहे हैं। शारीरिक स्वास्थ्य चिंता का विषय बना हुआ है, ऐसे में प्रज्ञा योग का सहारा लिया जा सकता है जो कई तरह के रोगों को दूर करने में मददगार है।

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के योग विभाग के अनुसार योग शारीरिक और मानसिक दृढ़ता को मजबूत करता है। आज माना जा रहा है कि कमजोर इम्युनिटी के लोग कोरोना के चपेट में आने पर उससे संक्रमित हो रहे हैं। ऐसे में ऋषि प्रणीत जीवन शैली आसन, प्राणायाम तथा ध्यान तनाव को नियत्रंण में रखकर इम्युनिटी पावर को सशक्त बनाता है।

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योग विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि प्रतिदिन प्रातःकाल प्राणायाम और सूर्य का ध्यान जहां एक ओर मानसिक तनाव को दूर करता है, वहीं पं श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा निर्देशित प्रज्ञायोग के व्यायाम के सोलह आसन शरीर को स्वस्थ एवं मजबूत बनाने में कारगर हैं।

प्रज्ञायोग व्यायाम की इस पद्धति में आसनों, उप- आसनों, मुद्राओं तथा शरीर संचालन की लोम- विलोम क्रियाओं का सुन्दर समन्वय है। इसमें सभी प्रमुख अंगों का व्यायाम संतुलित रूप से होता है। इन आसनों को एक के बाद एक क्रम से करने में शरीर को स्वस्थ बनाने में मदद मिलती है।

ये आसन इस प्रकार हैं-

ताड़ासन : सीधे खड़े हों, श्वांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर उठाएं और पैरों की अंगुलियों पर खड़े हों। यह दिल के रोगों में लाभकारी है और कब्ज दूर करता है।

पाद हस्तासन : श्वांस को छोड़ते हुए नीचे की ओर झुकें, दोनों हाथों से जमीन को छुएं। पैर सीधे रखें और कोशिश करें कि सिर घुटनों को छुए। यह गैस में लाभदायक है और कमर के मोटापे को कम करने के साथ ही रीढ़ की हड्डी को भी मजबूत करता है।

वज्रासन : दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर वज्रासन में बैठें। यह पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है और तनाव को कम करता है।

उष्ट्रासन : घुटनों के बल बैठें, श्वांस लेते हुए कमर से पीछे की ओर मुड़ें और दोनों हाथों से पैरों को छुएं। हार्निया में यह आसान लाभदायक है और अस्थमा, कमर दर्द में फायदा होता है।

योग मुद्रासन : श्वांस छोड़ते हुए वज्रासन में आएं, आगे की ओर झुकें और दोनों हाथों को पीछे ले जाकर योग मुद्रा बनाएं। कोशिश करें कि सिर जमीन को छुए। यह पैंक्रियाज को मजबूत करता है। मधुमेह और रक्तचाप में लाभदायक है।

अर्धताड़ासन : श्वांस लेते हुए शरीर के ऊपरी हिस्से को उठाएं और वज्रासन में बैठते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर खींचे। यह दिल को मजबूत करता है और कमर दर्द में लाभकारी है।

शशांकासन : श्वांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुके। सिर से जमीन को छुएं। दोनों हाथ सिर के आगे रखें। यह पाचन संबंधी रोगों में लाभदायक है।

भुजंगासन : पैरों को पीछे की ओर खोल दें, दोनों हाथ कमर के बगल में रखें। श्वांस लेते हुए ऊपर की ओर उठें। आसमान की ओर देखें, कुछ देर इसी स्थिति में रहें। यह दिल और रीढ की हड्डी को मजबूत करता है तथा कमर दर्द में बेहद लाभदायक है।

तिर्यक भुजंगासन : इस आसन को दो बार करना है। श्वांस छोड़ते हुए पहले बाईं ओर मुड़ें और श्वांस लेते हुए वापस आएं। अब दाईं ओर से यही प्रक्रिया करें। यह महिलाओं के लिए काफी लाभकारी है। स्लीप डिस्क, किडनी में लाभदायक है।

शशांकासन- अर्धताड़ासन : इस क्रम में वापस शशांकासन में जाएं। इसके बाद अर्धताड़ासन करें।
उष्ट्रासन से ताड़ासन : इस बार उष्ट्रासन करते वक्त दोनों पैरों के पंजों पर बैठें। इसके बाद पाद हस्तासन फिर ताड़ासन करें।

ओम चेंटिंग : श्वांस छोड़ते हुए ओम का उच्चारण करते हुए दोनों हाथों की मुट्ठी बंद करें और ताकत लगाते हुए हाथों को नीचे की ओर लाएं।

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय प्रवक्ता के अनुसार प्रज्ञा योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी है। यह मांसपेशियों और आंतरिक अंगों को मजबूत करता है। इसके साथ ही पिटय़ूटरी ग्लैंड को कंट्रोल करता है। इससे मानसिक शक्ति बढ़ती है।

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