बैडमिंटन चैंपियन आरुषि

मेरठ की बेटी बनी बेमिसाल, बैडमिंटन चैंपियन आरुषि को राष्ट्रपति करेंगे सम्मानित

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मेरठ। मेरठ जनपद की गौरव बैडमिंटन प्लेयर आरुषि को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आगामी 22 जनवरी को बाल शक्ति पुरस्कार से सम्मानित करेंगे। आरुषि बचपन से ही न तो सुन सकती है और न ही बोल सकती है। आरुषि के संघर्ष की लम्बी दास्तान है। आरुषि और न तो उनके परिवारवालों ने कभी हिम्मत नहीं हारी। इसी हिम्मत और हौंसले का नतीज़ा है कि आरुषि ने बैडमिंटन के क्षेत्र में कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पदक जीतकर लगातार भारत का तिरंगा विश्वपटल पर शान से लहराया है।

कामयाबी को शब्दों की दरकार नहीं

अब आरुषि का सपना डेफ ओलम्पिक्स में भी भारत का नाम विश्वपटल पर रोशन करना है। बता दें कि ठीक से न सुन और बोल सकने वाली आरुषि आज करोड़ों लोगों को प्रेरणा दे रही है। आरुषि के संघर्ष की इस कहानी से उन युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए जो चंद मुश्किलों में ही हार मान जाते हैं। यह कहानी मेरठ की चौदह साल की बेटी आरुषि की है। आरुषि बचपन से ही सुन और बोल नहीं सकतीं हैं, लेकिन उन्होंने ऐसी कामयाबी हासिल की है जो चीख-चीखकर उनकी उपलब्धियों का बखान कर रही है।

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राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पदक जीतने वाली आरुषि को अब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आगामी 22 जनवरी को बाल शक्ति पुरस्कार देकर सम्मानित करेंगे

आरुषि बैडमिंटन चैम्पियन हैं और उनके घर में पदकों का ज़खीरा है। कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पदक जीतने वाली आरुषि को अब उनकी उपलब्धियों के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आगामी 22 जनवरी को बाल शक्ति पुरस्कार देकर सम्मानित करेंगे। राष्ट्रपति से पुरस्कार मिलने की इस ख़बर से आरुषि और उनके परिवार वालों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं है। आरुषि से एक न्यूज चैनल से अपनी टूटी-फूटी भाषा में उनके शब्द कम उनकी आंखे ज्यादा बोलती हुई नज़र आईं।

आरुषि बैडमिंटन चैम्पियन के पास उपलब्धियों की है लंबी लिस्ट

आरुषि के पिता की आंखें आज भी उस दौर को लेकर भर आती हैं। जब उन्हें आरुषि के बचपन में ये पता चला था कि आरुषि ज़िन्दगी भर न बोल सकती है न ही सुन सकती है, लेकिन आरुषि के माता पिता ने कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने जगह-जगह आरुषि को डॉक्टरों को दिखाया। आखिरकार उन्हें उस वक्त थोड़ी उम्मीद बंधी जब एक ट्रांसप्लांट के ज़रिए डॉक्टरों से ये भरोसा मिला कि वह पूरी तरह से तो नहीं, लेकिन थोड़ा-थोड़ा सुन सकेगी और थोड़ा-थोड़ा ही बोल सकेगी। आरुषि के माता-पिता को इस ख़बर से मानों सारा आसमान मिल गया हो। आरुषि को उनके माता-पिता ने और ख़ुद आरुषि ने खेल की दुनिया में अपना नाम रोशन करने की ठानी। इस बिटिया ने बैडमिंटन खेलना शुरु किया और फिर क्या था देखते ही देखते आरुषि ने पदकों की झड़ी लगा दी।

डेफ ओलम्पिक्स में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने का संजोए हुए हैं सपना

आरुषि की उपलब्धियों पर अगर नज़र डालें। तो उन्होंने 2018 में एशिया पेसिफिक डेफ यूथ बैडमिंटन चैम्पियनशिप मलेशिया में पदक जीता। छठें नेशनल जूनियर और सब जूनियर गेम्स ऑफ डेफ चेन्नई 2019 में कांस्य पदक जीता। पांचवें नेशनल गेम्स जूनियर और सब जूनियर गेम ऑफ डेफ रांची में मिक्सड डबल में स्वर्ण पदक जीता। इक्कीसवें नेशनल गेम्स ऑफ द डेफ चेन्नई 2017 में रजत पदक जीता इसके अलावा उनकी सफलता का लंबा कारवां है। आरुषि अभी कक्षा नौ की छात्रा हैं और आगे चलकर वह डेफ ओलम्पिक्स में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने का सपना संजोए हुए हैं।

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