मलाला यूसुफजई

मलाला यूसुफजई को मिली ऑक्सफॉर्ड से डिग्री, महिला शिक्षा के लिए खाई थी गोली

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नई दिल्ली। दुनिया की सबसे कम उम्र की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने एक और उपलब्धि अपने करियर में जोड़ ली है। पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के लिए अभियान चलाने के लिए आतंकवादियों की गोली खाने वाली मलाला यूसुफजई ने ब्रिटेन के प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र, राजनीतिक विज्ञान और अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री ​हासिल कर ली है।

ऑक्सफोर्ड से दर्शनशास्त्र, राजनीतिक विज्ञान और अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने की खुशी को बयां करना बहुत मुश्किल

ऑक्सफोर्ड के लेडी माग्ररेट हॉल कॉलेज से पढ़ाई करने वाली मलाला (22) ने परिवार के साथ जश्न मनाती दो तस्वीरें ट्वीट कर अपनी खुशी साझा की है। मलाला ने ट्वीट किया कि ऑक्सफोर्ड से दर्शनशास्त्र, राजनीतिक विज्ञान और अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने की खुशी को बयां करना बहुत मुश्किल है।

https://twitter.com/Malala/status/1273775945917378562

उन्होंने इस ट्वीट के साथ दो तस्वीरें साझा की है। एक तस्वीर में वह अपने परिवार के साथ एक केक के सामने बैठीं हैं, जिस पर लिखा है कि स्नातक की पढ़ाई पूरी करने की बधाई मलाला’, जबकि दूसरी तस्वीर में वह केक में लथपथ दिखाई दे रही हैं। इसके बाद मानवाधिकार कार्यकर्ता मलाला ने कहा कि वह अब नेटफ्लिक्स देखकर, किताबें पढ़कर और सो कर वक्त बिताएंगी।

आतंकवादियों ने दिसंबर 2012 में उत्तर-पूर्वी पाकिस्तान की स्वात घाटी में महिला शिक्षा का प्रचार करने के लिए मलाला के सिर में गोली मार दी थी

बता दें​ कि तालिबान के आतंकवादियों ने दिसंबर 2012 में उत्तर-पूर्वी पाकिस्तान की स्वात घाटी में महिला शिक्षा का प्रचार करने के लिए मलाला के सिर में गोली मार दी थी। गंभीर रूप से घायल मलाला को पाकिस्तान के सैन्य अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाया गया था। बाद में उन्हें इलाज के लिए ब्रिटेन भेज दिया गया था।

मलाला को 2014 में 17 साल की उम्र में भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी के साथ नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया

हमले के बाद तालिबान ने एक बयान जारी किया था कि अगर मलाला जिंदा बच भी गईं तो वह दोबारा उन्हें निशाना बनाएगा। बता दें कि मलाला को शिक्षा की वकालत करने के लिए 2014 में 17 साल की उम्र में भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी के साथ नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया था।

ठीक होने के बाद अपने वतन पाकिस्तान वापस लौटने में असमर्थ रहीं मलाला ब्रिटेन में रहने लगीं। उन्होंने पाकिस्तान नाइजीरिया, जॉर्डन, सीरिया और केन्या में शिक्षा की वकालत करने वाले स्थानीय समूहों के साथ मिलकर मलाला फंड की स्थापना की।

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