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विघ्न-बाधाओं को दूर करने वाली गणपति की विशेष पूजा का जानें महत्त्व

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लखनऊ डेस्क। गणेश चतुर्थी इस बार 2 सितंबर को मनाई जाएगी। विघ्नहर्ता गणेश जी को अनेक नामों से जाना जाता है और सभी नामों का धर्म शास्त्रों में व्याख्या दी गयी है । भगवान गणेश की पूजा वैदिक काल से ही चली आ रही है। वेदों में गणेश भी गणेश की पूजा अर्चना बतायी गयी है यहां तक की रुद्राष्टाध्यायी का प्रारंभ भी गणेश के मंत्रों से ही होता है।

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आपको बता दें इस वर्ष पुरी श्रद्धा से इनकी पूजा अर्चना करेंगे उनको विशेष लाभ प्राप्त होगा । धन चाहने वालों को शुक्र विपुल धन की प्राप्ति करा सकते हैं । यश संतान एवं आंखों की रोशनी की कामना रखने वालों को सूर्य देव की कृपा प्राप्त होगी । सामर्थ्य, साहस एवं बल चाहने वालों को मंगल का आशीष मिल सकता है और विद्या एवं बुद्धि चाहने वालों को बुध देव की कृपा प्राप्त हो सकती है। इसलिए इस वर्ष बुद्धि के दाता गणेश जी की जयन्ती का बहुत महत्व है।

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जानकारी के मुताबिक गणेश चतुर्थी के दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत होकर गणेश जी की प्रतिमा बनाई जाती है। यह प्रतिमा सोने, तांबे, मिट्टी या गाय के गोबर से अपने सामर्थ्य के अनुसार बनाई जा सकती है। इसके पश्चात एक कोरा कलश लेकर उसमें जल भरकर उसे कोरे कपड़े से बांधा जाता है। तत्पश्चात इस पर गणेश प्रतिमा की स्थापना की जाती है। गणेश जी को दक्षिणा अर्पित कर उन्हें 21 लड्डूओं का भोग लगाया जाता है। गणेश प्रतिमा के पास पांच लड्डू रखकर बाकि ब्राह्मणों में बांट दिये जाते हैं। गणेश जी की पूजा सांय के समय करनी चाहिये।

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