चलते विमान में सोती हुई महिला के साथ यौन शोषण करने वाले भारतीय को 9 साल की सज़ा

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वॉशिंगटन। चलते विमान में दुष्कर्म करने की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। इसी क्रम में अमेरिका का एक मामला सामने आया है जिसमे विमान में एक महिला का यौन शोषण करने वाले भारतीय इंजीनियर प्रभु राममूर्ति (35) को अमेरिका की कोर्ट ने 9 साल की सजा सुनाई। राममूर्ति ने इस साल जनवरी में एक कमर्शियल प्लेन में महिला का उत्पीड़न किया था। तमिलनाडु के रहने वाले प्रभु को अमेरिका की कोर्ट ने उसे दोषी करार दिया।

बता दें कि प्रभु राममूर्ति 2015 में एच-1बी वीजा पर अमेरिका गया था। डेट्रॉयट के कोर्ट कहा कि राममूर्ति को सजा पूरी होने के बाद भारत भेज दिया जाएगा। जज टेरेंस बर्ज ने कहा कि फैसले से इस तरह के अपराध करने वालों को सीख मिलेगी। प्रॉसिक्यूटर ने प्रभु के लिए 11 साल की सजा की मांग की थी।सजा सुनाए जाने के बाद अटॉर्नी मैथ्यू श्नाइडर ने कहा- जब व्यक्ति विमान में यात्रा करता है तो सुरक्षित रहना उसका अधिकार है। इस दौरान किसी व्यक्ति का बुरा बर्ताव किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हमें पीड़िता की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने सामने आकर इस बारे में बोलने की हिम्मत जुटाई।

गौरतलब है कि कोर्ट ने प्रभु राममूर्ति को अगस्त में पांच दिन चली सुनवाई के बाद दोषी करार दिया गया था। फैसला सुनाने से पहले कोर्ट में महज साढ़े तीन घंटे जिरह चली। कोर्ट में पेश किए गए सबूतों के मुताबिक- राममूर्ति ने 3 जनवरी को फ्लाइट में सो रही एक महिला का यौन उत्पीड़न किया था। विमान लास वेगास से डेट्राॅयट जा रहा था। राममूर्ति जब यौन शोषण कर रहा था तब उसकी पत्नी भी बगल में बैठी हुई थी। प्रॉसिक्यूशन ने कोर्ट में डिजिटली सबूत पेश किए। जब पीड़िता की नींद खुली तो उसने कपड़ों को अस्त-व्यस्त हालत में पाया और अटेंडेंट को मदद के लिए बुलाया। एफबीआई के स्पेशल इन्चार्ज एजेंट टिमोथी स्लेटर ने कहा- यह फैसला बताता है कि विमान में यात्रियों की सुरक्षा की हमारे लिए सबसे अहम है।

बता दें कीएक सर्वेक्षण के मुताबिक 2014 से 2017 के बीच चलते विमान में यौन शोषण की घटनाओं में 66% का इजाफा हुआ। विमान में कम जगह का होना, यात्रियों का नशे की हालत में होना, अटेंडेंट की कम संख्या और रात की फ्लाइट में अंधेरा होना इसकी वजह हैं। कोर्ट में दिए दस्तावेजों में बताया गया कि दोषी प्रभु तमिलनाडु में पला-बढ़ा। उसके माता-पिता किसान हैं। ग्रेजुशन पूरा करने के बाद वह जुलाई 2015 में अमेरिका आ गया। सुनवाई के दौरान प्रभु ने खुद को अंग्रेजी न जानने वाला एक भ्रमित व्यक्ति बताया। जबकि वह अच्छी नौकरी में था।

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