हथियार नहीं डालेंगे पंजशीर के शेर- कार्यवाहक राष्ट्रपति सालेह

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कार्यवाहक अफगानिस्तानी राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह बोले कि वो अफगान नागरिकों के अधिकारों के लिए लड़ते रहेंगे। बकौल सालेह, ‘हमारा प्रतिरोध सभी अफगानिस्तानियों के अधिकारों की रक्षा करना है। ये प्रतिरोध पंजशीर में आधारित है। आज, ये घाटी पूरे देश की मेजबानी करती है। घाटी उन अफगानिस्तानियों की उम्मीद है, जो उत्पीड़न से बचने की चाह में हैं।’ गौरतलब है कि तालिबान भी तक पंजशीर में कदम नहीं रख पाया है।

दरअसल, तालिबान पंशीर प्रांत में कई बार घुसने की कोशिश कर चुका है, मगर हर बार उसे मुंह की ही खानी पड़ी है। पंजशीर में उपराष्ट्रपति अमरूल्लाह सालेह और अहमद मसूद की अगुवाई में रेसिस्टेंस फोर्स के सामने तालिबानी लड़ाके कमजोर नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि तालिबान अब शांति वार्ता का राग अलाप रहा है। ताजा घटनाक्रम में पंजशीर घाटी के नॉर्दर्न अलांस ने दावा किया है कि उसने हमला करने आए तालिबान के करीब 350 लड़ाकों को मार गिराया है।

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बता दें कि पंजशीर घाटी में अफगानिस्तान के कार्यवाहक राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह भी मौजूद हैं जिन्होंने तालिबान को अफगानिस्तान से उखाड़ फेंकने की कसम खाई हुई है। इसके साथ ही अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद भी यहीं हैं और उन्होंने कहा है कि मैं अहमद शाह मसूद का बेटा हूं। मेरी डिक्शनरी में सरेंडर जैसा कोई शब्द नहीं है। तो ऐसे में तालिबान के लिए पंजशीर घाटी पर नियंत्रण बेहद मुश्किल होने वाला है।

Divyansh Singh

मिट्टी का तन, मस्ती का मन; छड़ भर जीवन, मेरा परिचय।

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