एकेडमी में लड़की होने के कारण नही हुआ दाखिला, लड़का बन भारतीय महिला ने ली थी ट्रेनिंग

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नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम को जीत दिलाने में युवा खिलाड़ी शैफाली वर्मा ने अहम भूमिका निभाई। शैफाली हरियाणा के रोहतक की रहने वाली हैं। रोहतक में जूलरी दुकान चलाने वाले शैफाली के पिता संजीव ने बताया कि कोई मेरी बेटी को लेना नहीं चाहता था, क्योंकि वह लड़कियों के लिए एक भी एकेडमी नहीं थी। मैंने उनसे बहुत आग्रह किया कि वे मेरी बेटी को अपने यहां ट्रेनिंग देने के लिए शामिल कर ले, लेकिन किसी ने भी मेरी बात नहीं सुनी। उन्होंने कहा कि आखिरकार मजबूर होकर मैंने अपनी बेटी के बाल कटवा कर उसे एक एकेडमी ले गया और लड़के की तरह उसका ऐडमिशन कराया।

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आपको बता दें शैफाली में क्रिकेट का पैशन उस वक्त शुरू हुआ जब सचिन तेंडुलकर 2013 में हरियाणा में अपना आखिरी रणजी मैच खेलने आए थे। 9 साल की शैफाली चौधरी बंसी लाल क्रिकेट स्टेडियम में अपने पिता के साथ बैठी सचिन, सचिन के नारे लगा रही थी।

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जानकारी के मुताबिक लड़कों के साथ खेलते हुए शैफाली का का क्रिकेट को लेकर जुनून  बढ़ता गया। जिसके बाद शैफाली के स्कूल ने लड़कियों के लिए क्रिकेट टीम बनाने का फैसला किया। उनके पिता संजीव बताते हैं कि, लड़कों के खिलाफ खेलना आसान नहीं था, क्योंकि अक्सर उसकी हेलमेट में चोट लगती थी। कुछ मौकों पर गेंद उसके हेलमेट ग्रिल पर भी लगती थी। मैं डर जाता था, लेकिन उसने हार नहीं मानी।

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