कच्चा तेल

तेल के भंवर में मोदी सरकार, अमेरिकी छूट 2 मई को खत्म और ढ़ीली होगी आपकी जेब!

426 0

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 के बीच ईरान पर पाबंदी के बाद कच्चा तेल मोदी सरकार की चिंताएं बढ़ा सकता है। अमेरिका ईरान से कच्चे तेल के आयात पर आगे किसी देश को दो मई के बाद कोई भी छूट नहीं देगा।

भारत अपनी जरुरत का करीब 12 फीसदी कच्चा तेल खरीदता है ईरान से

अमेरिका इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारत और चीन पर पड़ने वाला है। बता दें कि भारत अपनी जरुरत का करीब 12 फीसदी कच्चा तेल ईरान से खरीदता है। ऐसे में ईरान से रोक के बाद भारत को नए देशों से तेल खरीदना होगा जो महंगा सौदा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान से सप्लाई बंद होती है तो दो मई के बाद क्रूड कीमतों में और तेजी आ सकती है। ऐसे में पेट्रोल-डीज़ल महंगा हो जाएगा। इसके साथ ही, महंगाई बढ़ने से आम आदमी की मुश्किलें बढ़ेंगी। वहीं, देश की आर्थिक विकास पर भी इसका निगेटिव असर होगा।

जो देश ईरान से तेल आयात पूरी तरह बंद नहीं करेगा, उसे अमेरिकी प्रतिबंध झेलना पड़ेगा

अमेरिका ने  विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जो देश ईरान से तेल आयात पूरी तरह बंद नहीं करेगा, उसे अमेरिकी प्रतिबंध झेलना पड़ेगा। इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने वॉशिंगटन पोस्ट को रविवार को बताया था कि अमेरिका दो मई के बाद किसी भी देश को ईरान से तेल आयात करने की कोई छूट नहीं देगा।

ये भी पढ़ें :-गढ़चिरौली नक्सली हमला : शरद पवार ने देवेन्द्र फडणवीस से मांगा इस्तीफा 

ईरान से क्रूड सप्लाई रुकने के बाद क्या होगा भारत  का?

क्रूड महंगा होने से भारत को इसके लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी। ऐसे में घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। ईरान की जगह अन्य देशों से कच्चा तेल आयात करने से परिवहन पर होने वाला खर्च बढ़ जाएगा। भारत ईरान से हर रोज करीब 4.5 लाख बैरल कच्चे तेल की खरीद करता है।

भारत, ईरान के ऑयल एंड गैस सेक्टर में सबसे बड़ा निवेशक, दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में भी बढ़ सकती है टेंशन 

भारत, ईरान के ऑयल एंड गैस सेक्टर में सबसे बड़ा निवेशक है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में भी टेंशन बढ़ सकती है। कच्चे तेल को लेकर सऊदी अरब, कुवैत और इराक जैसे मध्यपूर्वी देशों पर भारत की निभर्रता बढ़ेगी। इतना ही नहीं अमेरिका के साथ भी क्रूड खरीदने के बड़े समझौते हो सकते हैं, जिसके लिए भारत को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। पिछले साल भारत ने अमेरिका से 30 लाख टन क्रूड ऑयल खरीदने का समझौता किया था।

महंगे क्रूड से जीडीपी पर 0.10 से 0.40 फीसदी तक का बढ़ जाता है बोझ 

जाने महंगे क्रूड से भारत पर क्या होगा असर? ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी नोमुरा के अनुमान के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का राजकोषीय घाटा और करंट अकाउंट बैलेंस पर असर होता है। मतलब साफ है कि महंगे क्रूड से जीडीपी पर 0.10 से 0.40 फीसदी तक का बोझ बढ़ जाता है। सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने भी कहा है कि तेल की कीमतों में $10 प्रति बैरल की वृद्धि जीडीपी ग्रोथ को 0.2 से 0.3 प्रतिशत नीचे ला सकती है।वर्तमान में करंट अकाउंट डेफिसिट 9 से 10 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।

Related Post

Diwali 2019: रंग-बिरंगे फूलों के इस्तेमाल से इस दिवाली पर पाए एक खुबसूरत लुक

Posted by - October 27, 2019 0
लाइफस्टाइल डेस्क। इस दिवाली जैसे सभी त्यौहारों पर अपने आप में सुंदर दिखने के लिए महिलाएं बहुत कुछ करती हैं।…
धर्मेंद्र यादव

लोकसभा चुनाव 2019: ‘अखिलेश, मायावती जिसे चाहेंगे, वही बनेगा अगला पीएम’- धर्मेंद्र यादव

Posted by - May 6, 2019 0
आजमगढ़। सपा पार्टी के नेता धर्मेंद्र यादव ने सोमवार यानी आज दावा किया है कि उत्तर प्रदेश की जनता सपा-बसपा-रालोद…