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निज्जर हत्याकांड: RCMP को नहीं मिले सबूत, भारत-कनाडा रिश्तों पर नई उम्मीद

India-Canada

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ओटावा/चंडीगढ़। भारत और कनाडा के बीच पिछले करीब तीन वर्षों से जारी गंभीर राजनयिक गतिरोध के बीच एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा मोड़ आया है। कनाडा की संघीय पुलिस ‘रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस’ (आरसीएमपी) ने खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या (Nijjar Murder Case) के मामले में अब तक का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला आधिकारिक खुलासा किया है। आरसीएमपी ने पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी गहन जांच में अब तक ऐसा कोई भी सबूत या साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो सके कि भारत सरकार या उसके किसी भी राजनयिक/अधिकारी की इस हत्या में कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष भूमिका थी। कनाडाई पुलिस के इस आधिकारिक बयान के बाद भारत सरकार के उस रुख को वैश्विक स्तर पर बड़ी मजबूती मिली है, जिसमें भारत शुरू से ही इन आरोपों को सिरे से खारिज करता आ रहा था।

लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ पर अमेरिका में मामला दर्ज

यह सनसनीखेज खुलासा बिल्कुल उसी समय सामने आया है, जब अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) ने अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और कनाडा में छिपे उसके बेहद करीबी सहयोगी गोल्डी बराड़ के खिलाफ हरदीप सिंह निज्जर की हत्या (Nijjar Murder Case) की साजिश रचने (कंसपिरेसी) का एक नया आपराधिक मामला दर्ज किया है। कनाडाई संघीय पुलिस आरसीएमपी (RCMP) की डिप्टी कमिश्नर लीसा मोरलैंड ने इस संबंध में आधिकारिक तौर पर मीडिया को ब्रीफ करते हुए साफ कहा कि हमारी जांच टीम को ऐसा कोई भी तकनीकी या दस्तावेजी साक्ष्य नहीं मिला, जो इस हत्याकांड में किसी भारतीय सरकारी अधिकारी की संलिप्तता की पुष्टि करता हो। इसके साथ ही डिप्टी कमिश्नर मोरलैंड ने एक और महत्वपूर्ण बात स्वीकार करते हुए कहा कि इस जटिल मामले की जांच के दौरान भारत सरकार और उसकी सुरक्षा एजेंसियों ने कनाडाई जांच एजेंसियों को हर स्तर पर आवश्यक और महत्वपूर्ण कूटनीतिक सहयोग उपलब्ध कराया।

ट्रूडो के आरोपों से शुरू हुआ अभूतपूर्व राजनयिक संकट

आरसीएमपी के इस ताजा बयान ने सितंबर 2023 से दोनों देशों के संबंधों पर छाए विवाद के बादलों को पूरी तरह साफ कर दिया है। ज्ञात हो कि सितंबर 2023 में तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कनाडाई संसद (हाउस ऑफ कॉमन्स) में खड़े होकर बेहद गंभीर और बिना किसी ठोस सबूत के दावा किया था कि निज्जर की हत्या में ‘भारतीय एजेंटों’ की संभावित भूमिका हो सकती है। भारत सरकार ने ट्रूडो के इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद, तथ्यहीन और घरेलू राजनीति से प्रेरित बताते हुए तीखे शब्दों में खारिज कर दिया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध इतिहास के सबसे खराब दौर में पहुंच गए थे; दोनों देशों ने एक-दूसरे के शीर्ष और वरिष्ठ राजनयिकों को देश से निष्कासित कर दिया था और भारत ने एहतियातन कनाडाई नागरिकों के लिए अपनी वीजा सेवाओं को भी अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया था।

पंजाब के युवाओं को मिलेगी बड़ी राहत, कनाडा को हुआ था ₹85,000 करोड़ का नुकसान

इस पूरे अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विवाद की सबसे भारी कीमत और सीधा असर भारतीय राज्य पंजाब के युवाओं और परिवारों पर देखने को मिला था। चूंकि कनाडा जाने वाले भारतीय छात्रों और प्रवासियों में पंजाब की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा (करीब 70% से अधिक) है, इसलिए वीजा सेवाओं में आई बाधा और दोनों देशों के बीच उपजे तनाव के कारण हजारों पंजाबी छात्रों का भविष्य पूरी तरह अनिश्चितता के भंवर में फंस गया था। गतिरोध के दौरान स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि पंजाब से कनाडा जाने वाले युवाओं का वीजा रिजेक्शन रेट (अस्वीकृति दर) लगभग 70 फीसदी तक पहुंच गया था, जिससे अनेक छात्रों को अपनी उच्च शिक्षा की योजनाएं मजबूरन बदलनी पड़ी थीं। इस राजनीतिक विवाद के कारण केवल पंजाब ही नहीं, बल्कि खुद कनाडा को भी एक भयानक आर्थिक मंदी और नुकसान झेलना पड़ा। भारतीय छात्रों की संख्या में आई इस ऐतिहासिक गिरावट के कारण कनाडा के शिक्षा क्षेत्र और वहां की यूनिवर्सिटीज को अनुमानित ₹85,000 करोड़ ($85K Crore) से अधिक का भारी-भरकम वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है।

विश्वास बहाली के नए दौर की शुरुआत और खुशी की लहर

कनाडाई पुलिस की इस क्लीन चिट के बाद अब दोनों देशों के बीच दोबारा विश्वास बहाल होने और द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की प्रबल संभावना बन गई है, जिससे पंजाब के व्यापारिक और प्रवासी गलियारों में खुशी की लहर है। कनाडा के पूर्व सांसद रमेश संघा ने आरसीएमपी के इस आधिकारिक निष्कर्ष पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बिना किसी ठोस और पुख्ता साक्ष्यों के भारत जैसे एक जिम्मेदार और दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश पर अंतरराष्ट्रीय मंच से इतने गंभीर आरोप लगाना पूरी तरह अनुचित और गैर-जिम्मेदाराना था। वहीं, जाने-माने लेखक और विश्लेषक जोगिंदर बॉसी ने इस घटनाक्रम को एक नई शुरुआत बताते हुए कहा कि इस निर्णय से पंजाब के लाखों चिंतित परिवारों ने राहत की सांस ली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब दोनों देशों के बीच वीजा प्रक्रियाएं पुनः सामान्य होंगी, जिससे पंजाब के होनहार छात्रों, कारोबारियों और वहां रह रहे एनआरआई (NRI) परिवारों को एक बार फिर सकारात्मक और सुरक्षित माहौल मिल सकेगा।

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