Site icon

बागी नेताओं ने हाईकमान पर जताया भरोसा, चन्नी गुट ने नेतृत्व को लेकर रखी अपनी बात

Charanjit Singh Channi

Charanjit Singh Channi

चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में सांगठनिक बदलावों और नए फॉर्मूले को लेकर उभरी अंदरूनी नाराजगी के बीच अब बागी नेताओं के सुर कुछ नरम पड़ते दिखाई दे रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत उनके गुट के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे पार्टी के भीतर किसी भी तरह के सीधे टकराव की स्थिति नहीं चाहते हैं। इन नेताओं का तर्क है कि एक लोकतांत्रिक पार्टी में किसी नीति या निर्णय पर मतभेद होना स्वाभाविक है और हर वरिष्ठ नेता के अनुभव का अपना एक मूल्य होता है; वे सभी कांग्रेस के झंडे तले पूरी तरह एकजुट हैं, लेकिन अपनी जायज बात को आलाकमान के समक्ष रखना कतई गलत नहीं है।

बागी धड़े के नेताओं का मानना है कि पंजाब विधानसभा चुनाव अब बेहद नजदीक हैं, ऐसे में राज्य के भीतर सांगठनिक स्तर पर किसी भी नए ‘एक्सपेरिमेंट’ (प्रयोग) को करने का यह सही समय नहीं है। दरअसल, इन नेताओं का सीधा इशारा मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पद पर बनाए रखते हुए उनके सहयोग के लिए तीन नए ‘कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष’ (वर्किंग प्रेसिडेंट) नियुक्त किए जाने के नए फॉर्मूले की तरफ था। यह विवादित फॉर्मूला पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल ने तैयार कर दिल्ली आलाकमान को सौंपा था, जिस पर अंतिम मुहर भी लग चुकी है; जबकि नाराज गुट की मुख्य मांग प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग को पूरी तरह से पद से हटाकर कमान किसी अन्य वरिष्ठ चेहरे को सौंपने की थी।

इस पूरे विवाद पर पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री और वर्तमान सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पार्टी की एकजुटता का दावा करते हुए स्थिति स्पष्ट की। रंधावा ने कहा कि पंजाब कांग्रेस में कोई टूट नहीं है और सभी वरिष्ठ नेता किसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के बजाय सामूहिक रूप से दिल्ली जाकर आलाकमान से मुलाकात करेंगे। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि मतभेदों को आपसी संवाद से ही सुलझाया जाएगा और इस संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत वे केवल प्रभारी भूपेश बघेल से ही नहीं, बल्कि संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और शीर्ष नेता राहुल गांधी से भी मिलकर पंजाब की जमीनी परिस्थितियों पर अपनी बात मजबूती से रखेंगे।

इसी क्रम में पूर्व हॉकी कप्तान और कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने भी पार्टी के लोकतांत्रिक स्वरूप की वकालत करते हुए कहा कि विचारों में भिन्नता होना दल की आंतरिक जीवंतता को दर्शाता है, न कि किसी बगावत को। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि सभी नेता आपसी गिले-शिकवे दूर कर आगामी विधानसभा चुनाव पूरी ताकत और एकजुटता के साथ लड़ेंगे ताकि पंजाब में पुनः कांग्रेस की मजबूत सरकार बनाई जा सके। परगट सिंह के अनुसार, सभी बड़े नेता सामूहिक रूप से हाईकमान के समक्ष अपनी चिंताओं को रखेंगे और वहां से मिलने वाले अंतिम दिशा-निर्देशों व मार्गदर्शन के अनुसार ही राज्य में पार्टी की भावी चुनावी रणनीति तय की जाएगी। इस रुख से साफ है कि पंजाब कांग्रेस का यह संकट अब दिल्ली दरबार में ही सुलझेगा।

Exit mobile version