बुलंदशहर मामला: हत्या का मुख्य आरोपी बजरंग दल का नेता गिरफ्तार

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बुलंदशहर। इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की हत्या के बाद प्रशासन सख्त हुआ है और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिवंगत इंस्पेक्टर की पत्नी को 40 लाख रुपए और उनके माता-पिता को 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया था । उन्होंने आश्रित परिवार को पेंशन और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का भी आश्वासन दिया।

साथ ही गोकशी के शक में भड़की हिंसा के दौरान मारे गए इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की हत्या के आरोप में पुलिस ने मंगलवार को मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी योगेश राज बजरंग दल का नेता है। इसी ने सोमवार को गोकशी होने की शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस इस मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। चिंगरावठी इलाके में सोमवार को गोकशी के शक में हिंसक प्रदर्शन भी हुआ था। इस दौरान जब पुलिस दंगाइयों को रोकने पहुंची तो भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। इस दौरान इंस्पेक्टर सुबोध की गोली लगने से मौत हो गई थी। गोली लगने के बाद भी भीड़ इंस्पेक्टर को पीटती रही। हिंसा में एक युवक भी मारा गया।

साथ ही पुलिस ने मामले में दो एफआईआर दर्ज की हैं। पहली एफआईआर स्लॉटर हाउस पर और दूसरी हिंसा को लेकर दर्ज हुई है। एफआईआर में 27 नामजद और 60 अज्ञात आरोपी हैं। इनमें बजरंग दल का नेता योगेश राज, भाजपा युवा अध्यक्ष शिखर अग्रवाल, विहिप कार्यकर्ता उपेंद्र राघव भी नामजद है।

उधर इंस्पेक्टर सुबोध का पार्थिक शरीर मंगलवार को उनके पैतृक गांव तिरिगवां लाया गया। यहां बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन में जुटे। इससे पहले पार्थिव शरीर एटा पुलिस लाइन लाया गया था। यहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी गई। एडीजी अजय आनंद, डीआईजी प्रीतिंदर सिंह, डीएम आईपी पांडेय, एसएसपी आशीष तिवारी ने श्रद्धांजलि दी।

गौरतलब है कि सुबोध ग्रेटर नोएडा में हुए अखलाक हत्याकांड की जांच में शामिल थे। वे 28 सितंबर 2015 से 9 नवंबर 2015 तक इस मामले में जांच अधिकारी थे। 28 सितंबर 2015 को ग्रेटर नोएडा के बिसाहड़ा गांव में कुछ युवकों ने अखलाक की हत्या कर दी थी। हमलावरों को शक था कि अखलाक के घर में गोमांस रखा गया था।

वही इस मामले को लेकर नेताओ ने राजनीती भी करनी शुरू कर दी है सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा- भाजपा के शासन में प्रदेश अराजकता के दौर से गुजर रहा है। वहीं, आजम खान ने कहा- अगर वहां मवेशियों के शव मिले हैं, तो पुलिस को मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। क्योंकि जिस क्षेत्र में यह हिंसा हुई वहां, मुस्लिम आबादी नहीं है।साथ ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि सूबे की भाजपा सरकार हर प्रकार की अराजकता को बढ़ावा देने का काम कर रही। उत्तरप्रदेश जैसे राज्य में भाजपा का जंगलराज कायम है। उन्होंने कहा कि मृतक के परिजनों को केवल आर्थिक मदद ही काफी नहीं है। दोषियों को समय रहते सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा है कि ऐसा महसूस हो रहा है कि राज्य में सरकार नाम की चीज नहीं है। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि यह चौंकाने वाला है कि जिस तरह से भीड़ ने अखलाक मामले की जांच कर रहे पुलिस अफसर को मार दिया। इन लोगों को कानून हाथ में लेने का अधिकार किसने दिया? राज्य की स्थिति पर ध्यान देने की बजाय योगी तेलंगाना में जहर उगल रहे हैं।

मेरठ जोन के एडीजी प्रशांत कुमार ने बातचीत में बताया कि,गोकशी मामले में सात लोगों सुदैफ चौधरी, इलयास, शराफत, अनस, साजिद, परवेज और सरफुद्दीन के खिलाफ गोवध अधिनियम की धारा के तहत मुकदमा दर्ज किया है। 2 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया गया है। जांच के एंगल में यह भी देखा जाएगा कि हिंसा क्यों हुई और क्यों पुलिसकर्मियों ने इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को अकेला छोड़ दिया।

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