बेसिक शिक्षा विभाग

शासनादेश को दरकिनार कर बेसिक शिक्षा विभाग लगा रहा है अडंगा

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लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षा का अधिकार अधिनियम का पालन करने में लापरवाही बरती जा रही है। सरकारी सहायताप्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में आरटीई के तहत छात्र संख्या के अनुपात में शिक्षकों के पदों को स्वीकृत करने में विभाग द्वारा शासनादेश का अनुपालन कर कार्यवाही करने को लेकर कोताही बरती जा रही है। जिससे छात्रों को शिक्षकों के तैनात नहीं होने के कारण पढायी करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड रहा है।

जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षक पद सृजन को लेकर बरती जा रही लापरवाही

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षा का अधिकार आरटीई लागू होने के बाद कक्षा एक से आठ तक शिक्षा प्रदान करने को लेकर राज्य सरकार पर जिम्मेदारी का दायरा बढ गया हैं। शासन द्वारा आरटीई को लेकर सरकारी सहायताप्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में छात्र संख्या को लेकर बीते दिनों पुनरीक्षण की कार्यवाही की गयी। आरटीई के तहत शासनादेश जारी कर 35 छात्रों के मानक का अनुपालन कर विद्यालय की छात्र संख्या के अनुपात में शिक्षकों के पदों को सृजित कर 15 जनवरी 2017 के शासनादेश के तहत प्रदेश शासन ने निदेशक बेसिक शिक्षा को कार्यवाही के लिये अधिकृत किया।

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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारीयों के द्वारा छात्र संख्या के सापेक्ष पदों की स्वीकृति के लिये भेजे जा रहे प्रस्तावों पर  नही की जा रही है कार्यवाही

विभागीय सूत्रों का कहना है कि शासन के आदेश के बावजूद अब निदेशालय के द्वारा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारीयों के द्वारा छात्र संख्या के सापेक्ष पदों की स्वीकृति के लिये भेजे जा रहे प्रस्तावों पर कार्यवाही नही की जा रही है। निदेशालय द्वारा इटावा सहित कई जनपदों के प्रस्तावों पर शासन से प्रस्ताव पर कार्यवाही के लिये दिशा निर्देश की मांग कर अडंगा अटकाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इटावा के प्रकरण पर शासन द्वारा निदेशालय को अपने स्तर से कार्यवाही करने की व्यवस्था का पूर्व में जारी शासनादेश का हवाला देकर औपचारिक तौर पर बताने के साथ आदेश प्रक्रिया में गतिमान है।

गरीब छात्रों की पाठशाला में सहायक अध्यापक मानक के बावजूद नहीं हो पा रहे है तैनात 

वही निदेशालय प्राप्त अन्य जनपदों के प्रकरणों पर समान व्यवस्था होने के बावजूद शासन पर पल्ला डालते हुये सन्दर्भित कर रहा है। जिससे गरीब छात्रों की पाठशाला में सहायक अध्यापक मानक के बावजूद तैनात नहीं हो पा रहे है। सूत्रों के अनुसार बेसिक शिक्षा निदेशालय के द्धारा शासनादेश को दरकिनार कर प्रस्तावों पर कार्यवाही के आभाव में सूबे के कई सरकारी सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में करीब पांच सौ छात्र छात्राओं के होने के बावजूद महज चार सहायक अध्यापकों के सहारे पढ़ायी करा पाना विद्यालय प्रबंधनों के लिये दुश्वार हो गया है। ऐसे हालात में स्कूलों से अभिभावकों का भी सरकारी विद्यालयों से मोह भंग होने का खतरा बढ़ रहा है।

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