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मुख्यमंत्री घोषणाओं पर मुख्य सचिव का सख्त रुख, 303 लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश

Anand Bardhan

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को मुख्यमंत्री घोषणाओं को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने लंबे समय से लंबित घोषणाओं का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करने के साथ ही विलोपन, मर्ज अथवा अन्य विभागों को हस्तांतरण से जुड़े मामलों में भी तेजी लाने को कहा।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में अब तक कुल 4,611 मुख्यमंत्री घोषणाओं में से 2,852 घोषणाएं पूरी हो चुकी हैं। वहीं 1,759 घोषणाएं लंबित हैं। इनमें से 1,397 घोषणाओं पर विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई चल रही है, जबकि 59 घोषणाएं आंशिक रूप से पूरी हो चुकी हैं। वर्तमान में 303 घोषणाएं वास्तविक रूप से लंबित बताई गईं। इसके अलावा 447 घोषणाओं का विलोपन अथवा मर्ज किया जा चुका है।

मुख्य सचिव ने बताया कि 11 अगस्त 2026 को हुई पिछली समीक्षा में 627 घोषणाएं लंबित थीं, जिनकी संख्या अब घटकर 303 रह गई है। उन्होंने विभागवार लंबित घोषणाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को शेष मामलों में भी तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर

मुख्य सचिव ने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण मुख्यमंत्री घोषणाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। भूमि हस्तांतरण सहित अन्य प्रक्रियाओं के लिए विभागों के बीच निरंतर संवाद और समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने कहा कि जहां संभव हो, कार्यों को समानांतर रूप से शुरू किया जाए, ताकि समय की बचत हो और योजनाएं निर्धारित अवधि में पूरी की जा सकें। साथ ही मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति को संबंधित पोर्टल पर लगातार अपडेट करने के निर्देश दिए गए। सचिव और अपर सचिव स्तर के अधिकारियों को घोषणाओं की नियमित एवं गंभीर मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा गया।

मुख्य सचिव ने अगली समीक्षा बैठक अक्टूबर के मध्य में आयोजित करने के निर्देश भी दिए।

यमुनोत्री ट्रेक रूट के लिए बनेगी व्यापक कार्ययोजना

बैठक में मुख्य सचिव ने सम्पूर्ण यमुनोत्री ट्रेक रूट के सुधारीकरण के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अगले 15 दिनों में विस्तृत प्रस्तुतिकरण देने को कहा। इसके साथ ही ट्रेक रूट के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं की संभावनाओं पर भी काम करने के निर्देश दिए गए।

विभिन्न स्थानों पर प्रस्तावित ईको पार्कों को लेकर मुख्य सचिव ने कहा कि परिसंपत्ति निर्माण के साथ ही उनके संचालन और रखरखाव की व्यवस्था पहले से तय की जानी चाहिए, ताकि इनका बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।

पौड़ी हेरिटेज स्ट्रीट और मल्टीस्टोरी पार्किंग पर भी निर्देश

मुख्य सचिव ने पौड़ी शहर में मुख्य बाजार धारा रोड से एजेंसी चौक तक प्रस्तावित हेरिटेज स्ट्रीट के कार्य को आवास विभाग से पर्यटन विभाग को हस्तांतरित करने के संबंध में शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके अलावा मल्टीस्टोरी पार्किंग से संबंधित आवास विभाग को भेजे गए प्रस्तावों पर भी तेजी से कार्रवाई करने को कहा।

उन्होंने कहा कि किसी एक क्षेत्र में विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे अवस्थापना विकास और सौंदर्यीकरण के कार्यों को अलग-अलग तरीके से करने के बजाय आपसी समन्वय के साथ एकीकृत रूप से किया जाए, ताकि योजनाओं का समग्र प्रभाव बेहतर दिखाई दे।

उपयुक्त भूमि पर ही बनाए जाएं कोल्ड स्टोरेज

फलों के भंडारण के लिए प्रस्तावित कोल्ड स्टोरेज के संबंध में मुख्य सचिव ने भूमि की उपयुक्तता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अनुपयुक्त सरकारी भूमि पर कोल्ड स्टोरेज बनाने के बजाय आवश्यकता के अनुरूप उपयुक्त भूमि क्रय कर परियोजना विकसित की जाए, जिससे उसका दीर्घकालिक और बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।

मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी शहरों में ओपन स्पेस, सिटी पार्क और ईको पार्क जैसी सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में निजी भूमि क्रय कर ऐसी सुविधाएं विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाए।

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, डॉ. आर. राजेश कुमार, विनोद कुमार सुमन, युगल किशोर पंत, धीराज सिंह गर्ब्याल सहित अपर सचिव एवं विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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