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ज्योलिकोट दूषित पेयजल प्रकरण पर मुख्य सचिव ने ली अधिकारियों के साथ बैठक

Anand Bardhan

देहरादून। ज्योलिकोट, नैनीताल में दूषित पेयजल की घटना को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे प्रकरण की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने घटना पर कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि पेयजल की गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में मजबूत फील्ड नेटवर्क उपलब्ध होने के बावजूद ज्योलिकोट में दूषित पेयजल की स्थिति की जानकारी समय पर सामने नहीं आ सकी। उन्होंने शिक्षक, पटवारी, ग्राम पंचायत अधिकारी, ट्यूबवेल ऑपरेटर समेत फील्ड स्तर के कार्मिकों के नेटवर्क का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए ऐसा सूचना एवं फीडबैक तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए, जिससे पेयजल की गुणवत्ता अथवा स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या की सूचना तत्काल मिल सके।

प्रदेशभर की प्रमुख वाटर सप्लाई स्कीम्स की होगी जियो मैपिंग

मुख्य सचिव ने प्रदेशभर की प्रमुख वाटर सप्लाई स्कीम्स की जियो मैपिंग और जीआईएस जियो-रेफरेंसिंग कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्रोत से लेकर उपभोक्ता तक पानी पहुंचने की पूरी व्यवस्था का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए।

इसमें जल स्रोत, स्टोरेज टैंक, पाइपलाइन, सीवर लाइन, क्रॉसिंग प्वाइंट और उपभोक्ता स्तर तक के नेटवर्क को शामिल किया जाएगा। उन्होंने अगले 15 दिनों में प्रदेश की प्रमुख वाटर सप्लाई स्कीम्स का भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश भी दिए।

भौतिक सत्यापन के दौरान संभावित लीकेज, सीवर एवं पेयजल लाइनों के क्रॉसिंग प्वाइंट, पुराने पाइप और अन्य संवेदनशील स्थानों की जांच की जाएगी। आवश्यकता के अनुसार पुराने पाइपों को बदलने और अन्य सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

स्टोरेज टैंक और क्लोरीनेशन व्यवस्था की होगी जांच

मुख्य सचिव ने पेयजल स्टोरेज टैंकों की सफाई की तिथि, क्लोरीनेशन का रिकॉर्ड, क्लोरीन की उपलब्धता और उसके उपयोग का नियमित रिकॉर्ड रखने को कहा। साथ ही पानी में कॉलीफॉर्म सहित आवश्यक गुणवत्ता मानकों की जांच और उसका व्यवस्थित रिकॉर्ड सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने पेयजल और सीवरेज लाइनों के क्रॉसिंग प्वाइंट्स को विशेष रूप से चिन्हित करने पर जोर दिया, ताकि दूषित पानी की संभावित वजहों की पहचान कर समय रहते सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके।

पेयजल और सीवरेज लाइनों की जांच के लिए बनेगी एसओपी

मुख्य सचिव ने पेयजल और सीवरेज लाइनों की जांच के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर उसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि इंदौर की घटना के बाद विस्तृत एसओपी जारी की गई थी। इसके बावजूद यदि कहीं पेयजल दूषित होने की स्थिति सामने आती है तो यह भी जांचना जरूरी है कि एसओपी का पालन किस स्तर पर नहीं हुआ और उसके क्या कारण रहे।

प्रमुख पेयजल परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग के साथ व्यवस्था की प्रभावशीलता की भी समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।

यूकेपीसीबी करेगा नियमित पेयजल गुणवत्ता की जांच

मुख्य सचिव ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूकेपीसीबी) को एसटीपी और सरफेस वाटर के साथ-साथ प्रमुख शहरों में नियमित पेयजल गुणवत्ता परीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने प्रदेश के सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स का सरप्राइज इंस्पेक्शन कराने को भी कहा, ताकि उनके संचालन और निर्धारित मानकों के अनुपालन की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।

दूषित पेयजल की सूचना मिलते ही सक्रिय होगी स्वास्थ्य टीम

स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए कि जहां भी दूषित पेयजल अथवा इससे संबंधित कोई मामला सामने आए, वहां तत्काल स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी जाए। सीएमओ और सीएमएस स्तर की व्यवस्थाओं को सक्रिय रखते हुए डॉक्टरों की टीम को भी तैयार रखने को कहा गया है।

मुख्य सचिव ने अगले 15 दिनों में प्रदेशभर में आवश्यक स्वास्थ्य सर्विलांस और जांच की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही सर्विलांस सिस्टम किस तरह काम कर रहा है, इसकी नियमित समीक्षा करने को कहा गया।

स्थायी सर्विलांस मैकेनिज्म विकसित करने पर जोर

मुख्य सचिव ने कहा कि जिला स्तर पर गठित समितियां केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। समितियां ग्राउंड लेवल अधिकारियों के साथ समन्वय कर नियमित सूचना और फीडबैक प्राप्त करें।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल एक बार की कवायद न होकर स्थायी सर्विलांस मैकेनिज्म के रूप में विकसित की जानी चाहिए। आवश्यकता के अनुसार स्थायी स्टैंडिंग कमेटी गठित कर नियमित बैठकें आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए।

अनुभवी फील्ड कर्मचारियों के अनुभव का होगा इस्तेमाल

मुख्य सचिव ने विभागों को अपने सिस्टम को मजबूत करने के साथ इंस्टीट्यूशनल मेमोरी का उपयोग करने पर भी जोर दिया। उन्होंने सेवानिवृत्त लाइनमैन और लंबे समय तक फील्ड में काम कर चुके अनुभवी कर्मचारियों से पुराने पाइपलाइन नेटवर्क, क्रॉसिंग प्वाइंट और संवेदनशील स्थानों की जानकारी लेने की बात कही।

उन्होंने कहा कि इस अनुभव का उपयोग पुराने और संवेदनशील नेटवर्क की पहचान कर उन्हें दुरुस्त करने में किया जाना चाहिए।

लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में इस प्रकार की घटना सामने आने पर प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने की स्थिति में विभागाध्यक्षों की जवाबदेही तय की जाएगी और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय करना जरूरी है और पेयजल की गुणवत्ता से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक में सचिव डॉ. रणवीर सिंह चौहान, डॉ. वी. षणमुगम, सदस्य सचिव उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड डॉ. पराग मधुकर धकाते, मुख्य महाप्रबंधक जल संस्थान डी.के. सिंह तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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