Site icon

विकसित भारत के लिए आत्मनिर्भर गांव जरूरी: केशव प्रसाद मौर्य

Keshav-Maurya-3

लखनऊ। विश्व ग्राम्य विकास दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Maurya) ने प्रदेशवासियों, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र के नागरिकों, किसानों, महिलाओं, युवाओं तथा ग्राम्य विकास से जुड़े सभी अधिकारियों एवं कर्मियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ग्रामीण भारत का सर्वांगीण विकास ही विकसित भारत के निर्माण का सबसे सशक्त आधार है। उन्होंने कहा कि आज का दिन ग्रामीण क्षेत्रों में समावेशी, संतुलित एवं सतत विकास के संकल्प को और अधिक मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।

श्री मौर्य ने कहा कि विश्व ग्राम्य विकास दिवस का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त गरीबी एवं भुखमरी का उन्मूलन करना, प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना तथा शून्य भूख (Zero Hunger) के लक्ष्य को प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि जब गाँवों का विकास होगा, तभी समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचेगा और सामाजिक एवं आर्थिक असमानताओं को समाप्त किया जा सकेगा।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2030 तक निर्धारित सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की सफलता तभी सुनिश्चित होगी, जब उनका प्रभाव जमीनी स्तर तक पहुँचे। ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, रोजगार के अवसर, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण तथा आर्थिक उन्नति जैसे लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से लागू करना समय की आवश्यकता है।श्री मौर्य ने कहा कि ग्रामीण समुदायों, विशेषकर महिलाओं, युवाओं एवं वंचित वर्गों का आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण ग्राम्य विकास की आधारशिला है। स्वयं सहायता समूहों, कौशल विकास कार्यक्रमों, स्वरोजगार योजनाओं तथा ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देकर लाखों परिवारों की आजीविका को सुदृढ़ बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर गाँव ही आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करेंगे। उन्होंने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाएँ, कृषि यंत्रीकरण, वैज्ञानिक खेती तथा बेहतर विपणन व्यवस्था उपलब्ध कराकर कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। इससे खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि होगी। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पक्की सड़कें, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, स्वच्छ पेयजल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएँ तथा डिजिटल सेवाओं का विस्तार ग्राम्य विकास की गति को नई दिशा देता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, जिससे गाँवों में रहने वाले नागरिकों को भी शहरी क्षेत्रों जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें।

श्री मौर्य ने कहा कि वर्तमान समय में वित्तीय एवं डिजिटल समावेशन अत्यंत महत्वपूर्ण है। डिजिटल साक्षरता का विस्तार, प्रत्येक परिवार तक बैंकिंग सुविधाओं की पहुँच, डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन तथा ऑनलाइन सरकारी सेवाओं की उपलब्धता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक सशक्त और पारदर्शी बना रही है। इससे ग्रामीण नागरिकों को योजनाओं का लाभ सीधे एवं समयबद्ध रूप से प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर एवं सशक्त गाँव जलवायु परिवर्तन जैसी प्राकृतिक चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम होते हैं। मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं उत्पादन को बढ़ावा देती है, बल्कि राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजारों में भी अपनी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करती है।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार भी ग्रामीण अधोसंरचना, रोजगार सृजन, कृषि विकास, महिला सशक्तिकरण, स्वयं सहायता समूहों के सुदृढ़ीकरण, डिजिटल सेवाओं के विस्तार तथा ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि विश्व ग्राम्य विकास दिवस के अवसर पर सभी लोग समृद्ध, स्वावलंबी, स्वच्छ, शिक्षित एवं विकसित गाँवों के निर्माण का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि “समृद्ध और सशक्त गाँव ही विकसित राष्ट्र की सबसे मजबूत नींव होते हैं। जब गाँव आगे बढ़ेंगे, तभी उत्तर प्रदेश और भारत विश्व के अग्रणी राष्ट्रों की श्रेणी में और अधिक मजबूती से स्थापित होंगे।

Exit mobile version